चित्रकूट। डाकू बबुली कोल गैंग द्वारा अपहृत किसान लालमन उर्फ लल्लू नाटकीय ढंग से छूटकर मझगवां (मप्र)पहुंच गया। इसके बाद थाने में जाकर बताया कि रात को डकै तों के सो जाने पर वह चकमा देकर लगभग 12 किमी पैदल चलने के बाद जंगल के रास्ते भाग आया है। पुलिस उसकी कहानी पर विश्वास नहीं कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने अपहरण मामले को संदेहास्पद मानकर कहा कि अपहृत पहले से ही संदिग्ध है। रही बात रकम देकर छूटने की तो यह इतनी जल्दी संभव ही नहीं है। चारों तरफ जंगल में पुलिस बल तैनात था।
शनिवार की दोपहर जिले की सीमा क्षेत्र धारकुंडी थाने के झकसोर निवासी किसान लालमन उर्फ लल्लू चौधरी का उसके पुरवा हरसेड़ से डकैतों द्वारा अपहरण किए जाने की सूचना पर पुलिस बल परेशान था। अपहृत के परिजनों ने 25 लाख की फिरौती मांगने की बात बताई तो मप्र रींवा के आईजी डीआईजी व सतना एसपी मौके पर पहुंचे और जंगल में चार टीमों ने सर्च अभियान शुरू कर दिया। आईजी उमेश जोगा ने बताया था कि परिजनों की सूचना पर अपहरण मानकर तलाश शुरू की गई थी। रविवार की सुबह ही नाटकीय तरीके से अपहृत लालमन अपने गांव से लगभग 18 किमी दूर मझगवंा मप्र पहुंच गया। इसके बाद जब वह मझगवां थाने पहुंचकर थानाप्रभारी पवन पांडेय को बताया कि वह लालमन है जिसे डाकू बबुली कोल गैंग ने अपहरण कर लिया था। इतना सुनते ही पुलिस सतर्क हो गई और उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई।
अपहृत के सकुशल लौटने की जानकारी होते ही थाने के आसपास सैकड़ाें लोगाें की भीड़ एकत्र हो गई। सतना एसपी संतोष कुमार व जसो थाना प्रभारी ओपी चोगड़े ने अपहृत लालमन से पूछताछ शुरू की। अपहृत ने बताया कि डाकू बबुली कोल गैंग ही उनके पुरवा के पास पहुंचा था और उसका अपहरण कर जंगल में उसके मोबाइल से परिजनों से 25 लाख की फिरौती पहुंचाने की बात कहलवाई थी। शनिवार की देर रात डाकू सभी सो गए तो वह उन्हें चकमा देकर मार्कण्डेय जंगल से होता हुआ भाग आया। यह भी बताया कि वह किंहुनिया के जंगल के पास भी पहुंचा था। लगभग 12 किमी पैदल चलने के बाद वह सड़क तक आया था। रास्ते में अज्ञात बाइक चालक को रोककर मझगवंा पहुंच गया। इसके बाद दूसरे के मोबाइल से परिजनों को जानकारी दी है। डकैतों को कोई फिरौती नहीं पहुंचाई गई है।
उधर सतना एसपी ने बताया कि अपहरण की पूरी घटना संदिग्ध मालूम हो रही है। कुख्यात डाकू गैंग ने जिस तरह पहले अपहरण कर अपहृतों के साथ बर्ताव किया है उससे यह घटना बिल्कुल मेल नहीं खाती। फिरौती की रकम भी इतनी जल्दी पहुंचाना नामुमकिन है क्योंकि जंगल में चारों तरफ पुलिस बल मौजूद था। आसानी से पैदल चलकर थाने तक पहुंचना भी संदेह पैदा कर रहा है। कथित अपहृत लालमन पहले से भी संदिग्ध रहा है। पूरी संभावना है कि इसने किसी को फंसाने के लिए अपहरण का नाटक रचा था।
इस्लाम धर्म अपनाया
चित्रकूट। कथित अपहृत लालमन ने बिना किसी ठोस कारण के छह साल पहले इस्लाम धर्म अपना लिया है। इसलिए उसके नाम के साथ अब्दुल रहमान भी ज़ुड़ा है। गांव में कई बार विवाद के मामले में इसका नाम आ चुका है। एसपी के अनुसार धारकुंडी थाने में इसने एक हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था। जांच में पता चला था कि इसने खुद के हाथ में गोली मारने के बाद गांव के ही एक व्यक्ति पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
नहीं मिला मोबाइल
चित्रकूट। अपहृत का मोबाइल अभी नहीं मिला है। एसपी सतना ने बताया कि अपहृत बता रहा है कि मोबाइल डाकू लिए हैं। सर्विलांस के जरिए इसकी जानकारी की जाएगी जिससे राज खुलेगा।