भरतकूप (चित्रकूट)। धार्मिक नगरी चित्रकूट में चल रही 84 कोसीय परिक्रमा मंगलवार को पहला रात्रि विश्राम भरतकूप मंदिर में हुआ। भरतकूप मंदिर में जनकीकुंड के संत गोविंददास महाराज अपने अनुयायियों के साथ पहुंचे तो मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। बुधवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के बाद यात्रा पुन: अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई।
महाराज श्री ने बताया कि 84 कोसीय परिक्रमा पिछले 20 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। यह परिक्रमा कुल 30 दिनों में पूर्ण होती है। इसमें 20 दिन उत्तर प्रदेश और 10 दिन मध्य प्रदेश की सीमा में भ्रमण किया जाता है। यात्रा जानकीकुंड से प्रारंभ होकर कामतानाथ जी को दाहिने करते हुए भरतकूप मंदिर पहुंचती है, जहां पहला रात्रि विश्राम किया गया। मंदिर के महंत लवकुशदास ने संतों का विधिवत स्वागत किया और श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद की समुचित व्यवस्था कराई। देर रात तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चा का क्रम चलता रहा।
गोविंददास महाराज ने बताया कि भरतकूप से परिक्रमा का अगला पड़ाव ओरन होगा। इसके बाद यात्रा जमरेहीनाथ, लामिहारी और अतरोली होते हुए राजापुर पहुंचेगी। अंतिम चरण में परिक्रमा ओरन से सूरजकुंड पहुंचकर संपन्न होगी। 84 कोसीय परिक्रमा का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति आस्था जागृत करना और समाज को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करना है। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले गांवों में श्रद्धालु संतों का स्वागत कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। वहीं शाम को यात्रा अपने दूसरे पड़ाव ओरन पहुंची। जहां संतो का स्वागत हुआ।
यात्रा में शामिल संतों के लिए प्रसाद भंडारा की व्यवस्था समाजसेवी साकेत बिहारी शिवहरे ने की। इस दौरान डॉ. विनोद गुप्ता, सियाबिहारी, श्यामसुंदर, श्रीकांत, रमाकांत त्रिपाठी, रसिक शिवहरे, वैदेहीशरन, आशू शिवहरे, सुरेश, कुलदीप, राकेश ,दीपक ,वीरू, अनिल, प्रभात सहित अन्य व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
18 सीकेटीपी-14-भरकूप में रात्रि विश्राम के दौरान भोजन करते साधु संत। संवाद