चित्रकूट। दीपावली पर्व की आहट के साथ चित्रकूट में धार्मिक उत्साह चरम पर है। पवित्र मंदाकिनी तट पर 20 से 23 अक्टूबर तक लगने वाले भव्य मेले की तैयारियां प्रशासन ने पूरी बताई हैं, पर हकीकत इसके विपरीत है। आज धनतेरस से श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया और अनुमान है कि इस बार लगभग 25 से 30 लाख श्रद्धालु मंदाकिनी स्नान और दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
मंदाकिनी में स्नान करने के बाद श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा कर हनुमान धारा, सती अनुसूइया और गुप्त गोदावरी के दर्शन करते हैं, लेकिन इस आस्था के सैलाब के बीच घाटों की साफ-सफाई और जल की स्थिति खराब है।
मेले की जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों से अलग है। महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए लगाए गए स्टैंड के फ्लेक्स फटे हुए हैं। कुंभ मेले के लिए बनाए गए कपड़ा बदलने का स्टैंड जर्जर हो चुका है। इससे महिलाओं को निजता देने का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
घाटों की सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है। पितृ विसर्जन की तिलांजलि सामग्री अब तक घाटों पर जमी है और जगह-जगह काई, गंदगी है।
इंतजाम के नाम पर रामघाट पर पानी में प्लास्टिक की बैरिकेडिंग लगाई गई है, लेकिन कई स्थानों पर इसे ठीक से बांधा भी नहीं गया। श्रद्धालुओं को दिशा देने के लिए लाउडस्पीकर लगाए गए हैं और पुलिस व अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। रोशनी के इंतजाम, सजावट, झालर के साथ घाट की ओर जाने वाले रास्तों पर बनाए गए अस्थाई गेट लोगों को कुछ आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल, सार्वजनिक शौचालय और कचरा निस्तारण जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है।
सबसे चिंताजनक स्थिति शिव मंदिर के सामने की है, जहां छह इंच के पाइप से घरों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। श्रद्धालु इसी जल से स्नान कर इसे ही भगवान शिव को अर्पण करते हैं। श्रद्धालु कहते हैं कि अव्यवस्थाओं के बावजूद आस्था अडिग है, परंतु प्रशासन को स्वच्छता, जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था पर तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि मंदाकिनी की पवित्रता बनी रहे।
इनसेट
क्या कहते विशेषज्ञ
मंदाकिनी नदी का प्रवाह लगभग 130 किलोमीटर है, जिसमें 71 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है। रामघाट क्षेत्र में घरों और दुकानों से गिरने वाले नालों की संख्या आठ बताई जाती है। जल गुणवत्ता परीक्षण में नदी का जल सी श्रेणी का पाया गया है, जिसका अर्थ है कि यह न तो स्नान योग्य है और न पीने योग्य। रामघाट पर जैविक ऑक्सीजन मांग का स्तर लगभग 3.9 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जिससे प्रतिदिन करीब 1900 किलोग्राम तक प्रदूषण भार नदी में पहुंच रहा है।
12 सीकेटीपी-10- परिचय- रामघाट पर मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर के सामने मंदाकिनी में गिरता नाले का पानी।- फोटो : poni news