चित्रकूट। प्रस्तावित यूनेस्को ग्लोबल जियो पार्क की स्थापना के लिए सोमवार को यूनेस्को ग्लोबल जियो पार्क विशेषज्ञ डॉ. अलीरेजा अमरीकाजमी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ दल ने स्थलीय निरीक्षण किया। टीम तीन दिन तक यहां स्थान चिह्नित करेगी। सोमवार को दो स्थानों पर जाकर जानकारी जुटाई।
सोसाइटी ऑफ अर्थ साइंटिस्ट्स के सचिव डॉ. सतीश त्रिपाठी द्वारा यूनेस्को मुख्यालय को चित्रकूट जियो पार्क के लिए प्रस्ताव दिया गया था। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारें इस परियोजना में संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं और दोनों ही सरकारें यूनेस्को में आवश्यक डोजियर जमा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निरीक्षण के लिए यहां आई टीम में भूतपूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल (डीडीजी) भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) डॉ. सतीश त्रिपाठी, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रशांत सिंह बघेल, जियो पार्क समन्वयक और पर्यावरणविद् डॉ. अश्वनी अवस्थी व डीएसएन कॉलेज उन्नाव के प्रोफेसर डॉ. अनिल साहू शामिल हैं।
दौरे के पहले दिन दल ने चित्रकूट के प्रमुख भूवैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का दौरा किया। इनमें शबरी जलप्रपात, गुप्त गोदावरी गुफा, कामदगिरी पहाड़ी, गणेश बाग और सोमनाथ मंदिर शामिल हैं।
इन स्थलों का निरीक्षण करते हुए दल ने स्थानीय भूगर्भीय विशेषताओं, जैसे चट्टानों की उम्र, गठन प्रक्रिया और पर्यावरणीय महत्व का विस्तृत अध्ययन किया। दौरे के दौरान दल ने दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) के संगठन सचिव अभय महाजन से मुलाकात की और चित्रकूट में जियो पार्क की स्थापना पर चर्चा की। कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान जियो पार्क की स्थापना में यथासंभव सहयोग प्रदान करेगा।
यूनेस्को विशेषज्ञ डॉ. अली रेजा अमरी काजमी ने कहा कि प्रस्तावित जियो पार्क क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। बताया कि जियो पार्क न केवल भूवैज्ञानिक महत्व को संरक्षित करता है बल्कि स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। यह दौरा चित्रकूट को यूनेस्को ग्लोबल जियो पार्क के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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जियो पार्क से होगा पर्यटन विकास
यूनेस्को ग्लोबल जियो पार्क एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां भूवैज्ञानिक धरोहर को संरक्षित करते हुए सतत विकास को बढ़ावा दिया जाता है। विश्व में लगभग 177 जियो पार्क हैं और भारत में अभी तक एक भी जियो पार्क नहीं है। निरीक्षण के लिए आया विशेषज्ञों का दल अगले दो दिनों में अन्य संभावित स्थलों, बृहस्पति कुंड, रामघाट और मंदाकिनी नदी घाटी का निरीक्षण करेगा।