चित्रकूट। फरवरी माह से हो रही तेज धूप और बढ़ते तापमान ने रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बढ़ते तापमान से गेहूं, चना, सरसों, मसूर, मटर, अलसी और मक्का फसलों पर इसका असर दिख रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर मौसम का यही रुख बना रहा तो रबी फसलों की पैदावार काफी कम रहने की आशंका है।
रबी की फसलों के लिए फरवरी माह में अधिकतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच नमी बनाए रखने के लिए आदर्श माना जाता है लेकिन इस वर्ष फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। अत्यधिक गर्मी के कारण गेहूं की फसल में बालियां तो आ गई हैं लेकिन उनमें दाने नहीं पड़ रहे हैं। जिन खेतों में सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं, वहां फसलें सूखने भी लगी हैं।
पैदावार पर पड़ेगा असर : प्रगतिशील किसान योगेश जैन बताते हैं कि गेहूं की फसल को पकने के लिए नमी की आवश्यकता होती है लेकिन तेज धूप से पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं। इससे गेहूं की बालियों में दाने कम आ रहे हैं और पौधे सूखने की कगार पर हैं। चने की फसल में भी ढेली में दाने कम पड़ रहे हैं, जबकि सरसों की फसल में फूल झड़ने लगे हैं। किसान शैलेंद्र सिंह ने भी बताया कि फरवरी से ही गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, जिससे गेहूं की पत्तियां सूख रही हैं और बाली में दाना नहीं बन पा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के मौसम वैज्ञानिक मनोज शर्मा के अनुसार, तेज धूप से पौधों को पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे गेहूं की फसल पर असर पड़ रहा है और पैदावार कम होगी। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि तेज धूप के असर को कम करने के लिए गेहूं की फसल में पोटेशियम 005 रसायन का छिड़काव करें। वहीं, उप कृषि निदेशक राजकुमार ने किसानों से गेहूं की फसल की नियमित सिंचाई करते रहें ताकि पौधे सूखने से बच सके।
रबी की फसल का विवरण
जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला के अनुसार, चित्रकूट जिले में रबी की फसलों के तहत कुल 115276 हेक्टेयर भूमि पर बोआई की गई है। इसमें गेहूं 60542 हेक्टेयर, जौ 6402 हेक्टेयर, चना 26012 हेक्टेयर, मटर 710 हेक्टेयर, मसूर 5164 हेक्टेयर, तोरिया 1488 हेक्टेयर, सरसों 13760 हेक्टेयर और अलसी 1198 हेक्टेयर में लगी है।