चित्रकूट/राजापुर। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के शिक्षक व छात्रों का एक दल मानस चिंतन और नवीन खोज के लिए राजापुर पहुंचा। डॉ. जयप्रकाश तिवारी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय दल ने श्री राम चरित मानस के रचयिता संत तुलसीदास की जन्म भूमि, नांदी तौरा मंदिर और इससे जुडे़ रामायण काल के प्रसंगों को जाना।
डॉ. तिवारी ने बताया कि तुलसीदास ने मानस के माध्यम से समाज को आदर्श पूर्ण जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया है। संस्कार से साधना एवं साधना से सिद्धि का सद्मार्ग क्या होगा यह रामचरितमानस में वर्णित है। तुलसीदास को यह प्रेरणा पत्नी रत्नावली से मिली थी। पत्नी का गांव तुलसीदास के जन्म स्थान से बहने वाली नदी यमुना के उस पार है जो वर्तमान में जिला कौशांबी में स्थित है।
दल को दसवीं पीढ़ी के वर्तमान में मानस के संरक्षक पुजारी रामाश्रय त्रिपाठी ने तुलसीदास द्वारा लिखित, संरक्षित अयोध्या कांड का दर्शन एवं मर्मज्ञ विस्तार से बताया । इसके बादा दल हनुमान मंदिर भी गया। मंदिर के प्रधान पुजारी महेंद्र दास महाराज ने मंदिर की प्राचीनता के बारे में बताया। दल में शुभम राय त्रिपाठी, अनिल शुक्ला, मनीष शुक्ला, संतोष सेन आदि मौजूद रहे।