फोटो- 5- प्रसूता की मौत के बाद गमगीन अवस्था में बैठे परिजन
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शिवरामपुर(चित्रकूट)। शिवरामपुर सीएचसी में मौजूद स्टाफ पर रुपये न मिलने पर दर्द से तड़पती प्रसूता का इलाज शुरू नहीं करने का आरोप है। हालत बेहद गंभीर होने पर स्टाफ ने डाक्टरों की सलाह से उसे रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत हो गई। जिस पर परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा काटा। शिवरामपुर सीएचसी स्टाफ पर रुपये न मिलने पर इलाज न करने का आरोप लगाकर कार्रवाई कराने की मांग की। प्रसूता का जना नवजात सुरक्षित है उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है।
शिवरामपुर चौकी क्षेत्र के बैहार गांव की गर्भवती रेखा देवी (19) पत्नी नवल किशोर वर्मा को परिजनों ने प्रसव पीड़ा के चलते मंगलवार की शाम सीएचसी ले गए। जहां स्टाफ नर्सों ने प्रसव में देरी होने के चलते घर जाने को कहा। काफ ी आरजू मिन्नत के बावजूद गर्भवती को भर्ती नहीं किया गया। अगले दिन जब पुन: तीमारदार स्वास्थ्य केन्द्र आए तो स्टाफ ने दो हजार रुपये सुविधा शुल्क की मांग कर दी। रुपये मिलने पर गर्भवती भर्ती की गई। देर रात आपरेशन बाद शिशु का जन्म हुआ। प्रसूता के उपचार में कोई ध्यान न देने से हालत बिगड़ गई। सवेरे चिकित्सकों ने जिला अस्पताल भेजा। जहां डाक्टरों ने प्रसूता को मृत घोषित कर दिया। जिससे गुस्साए परिजनों ने सीएचसी में हंगामा काटा। मृतका के भाई शत्रुघन ने आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही की गई है। साथ ही सुविधा शुल्क लिया है। सही ढंग से आपरेशन न होने से रक्तस्राव शुरू हो गया था। ऐसे में डाक्टरों ने रेफ र कर दिया। कोतवाली में तहरीर दी है। इस संबंध में सीएमओ डा. विनोद कुमार ने बताया कि मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. विमलेश का कहना है कि प्रसूता के परिजनों को पहले ही हालत बिगड़ने की जानकारी दी गई थी। किसी प्रकार का सुविधा शुल्क नहीं लिया गया है। उधर सीएमओ डा. विनोद कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। संबंधित स्टाफ से जानकारी मांगी गई है।
रुपये मिलने के बाद शुरू किया इलाज
चित्रकूट। प्रसूता को सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स सुविधा शुल्क लेने के चक्कर में लगातार तीन दिन तक दौड़ाती रही। भाभी शांति ने बताया कि सोमवार को आशा उत्तरा देवी के साथ सीएचसी लाए थे। स्टाफ नर्सों ने भर्ती करने के बजाए प्रसव में समय होने की बात कहते हुए लौटा दिया था। मंगलवार की सुबह पुन: प्रसव वेदना के चलते स्वास्थ्य केन्द्र ले गए। जहां फिर भर्ती नहीं किया। दिन भर केन्द्र में बैठे रहे। शाम को रुपये देने के बाद इलाज शुरू हो सका।