चित्रकूट। वैसे तो सरकारी दफ्तरों में रविवार की छुट्टी थी। मगर कोषागार कार्यालय खुला था। रोजाना की तरह अफसर-कर्मचारी भी आए थे, पर किसी ने भी विभागीय कार्य नहीं किया, हालांकि कोषागार में हुए पेंशन घोटाला की जांच का दौर जारी रहा। एसआईटी की जांच में नए-नए राज सामने आ रहे हैं। रविवार को एसआईटी के समक्ष छह पेंशनर व बिचौलिए पेश हुए।
टीम ने उनसे एक-एक कर पूछताछ की। साथ ही उनके खाता व लेनदेन का मिलान भी किया। करीब तीन घंटे की पूछताछ में पेंशनरों व बिचौलियों ने खातों में निर्धारित से अधिक रकम आने की बात स्वीकारी। कोषागार के दो कर्मचारियों का नाम भी बताए। ये फोन कर इसकी जानकारी देते थे और फिर बिचौलियों के माध्यम से रुपये मंगाते थे।
एसआइटी प्रभारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा ने बताया कि दोनों विभागीय कर्मचारियों का नाम पहले भी कुछ पेंशनर बता चुके हैं। यह स्पष्ट हो चुका है कि विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और बिचौलियों के माध्यम से रुपये निकालकर रकम का बंदरबांट करते थे।
कोर्ट के लिए फाइल बनाते रहे अधिकारी
चित्रकूट। जांच अधिकारी इस समय जांच व पूछताछ के साथ अदालत के कागजात एकत्र करने के लिए पूरे दिन काम करना पड़ रहा है। अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि अबतक नामजद पेंशनर व बिचौलियों में 22 लोग जमानत की याचिका डाल चुके हैं। सभी याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्टे के लिए 10 ने हाईकोर्ट में याचिका डाली,अभी अवधेश प्रताप को स्टे मिला है अन्य के कागजात कोर्ट ने दोबारा मांगे हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता श्याम सुंदर मिश्रा ने बताया कि सोमवार को तीन जमानत याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
अवधेश प्रताप सिंह ने विभाग में साधा संपर्क
चित्रकूट। गिरफ्तारी से स्टे मिलने के बाद रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह ने रविवार को विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि इस दौरान उनकी मुलाकात हुई या नहीं यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अपने कार्यकाल के कई कागजात एकत्र करते देखे गए। शनिवार को वह पहली बार एसआईटी के सामने हाजिर हुए थे, जिसमें एक घंटे से अधिक समय तक की पूछताछ में वह कई विचलित हुए थे।