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सिंहल के निधन से संत-महंत सन्न

Thu, 19 Nov 2015 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
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चित्रकूट। दिवंगत अशोक सिंहल से चित्रकूट के संत महंत और समाजसेवियों की यादें जुड़ी हैं। स्व. सिंहल कई बार तीर्थक्षेत्र आए और संत महंतों के साथ बैठकें कर चित्रकूट के विकास और मंदाकिनी की शुचिता बनाए रखने को लेकर चर्चा की।
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लालापुर के वाल्मीकि आश्रम को भव्य बनाने की मंशा उन्होंने कई बार व्यक्त की, पर उनका यह सपना अभी पूरा नहीं हो सका।

राम मंदिर आंदोलन के सूत्रधार अशोक सिंहल की मृत्यु की खबर से तीर्थक्षेत्र के संत महंत सकते में हैं। इन लोगों ने बताया कि अशोक सिंहल लगभग छह बार चित्रकूट आए।

हर बार उन्होंने इस पवित्र तीर्थ के विकास के लिए सभी से एकजुट होने की जरूरत बताई। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास बताते हैं कि सिंहल जब भी चित्रकूट आते थे, सभी साधु-संतों का हालचाल जरूर पूछते थे।
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उनको सभी के नाम याद थे। वे हमेशा हिंदुओं की एकता और अखाड़ों को एक होने की बात कहते थे। बताया कि उन्होंने 50 छोटे-बड़े अखाड़ों को एक सूत्र में बांधा था।

दिव्यजीवन दास बोले, वे हनुमान का प्रतिरूप थे। हमेशा राम और राम मंदिर की बातें करते थे। जानकी महल मंदिर के महंत सीताशरण दास महाराज ने कहा कि अशोक सिंहल के जाने से समाज को जो क्षति हुई है, उसकी पूर्ति असंभव है। उनके मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव था।

बताया कि 1989 में दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यात्रा की अगुवाई अशोक सिंहल ने की थी, तब वह भी इसमें शामिल थे। विहिप के मझगवां प्रखंड अध्यक्ष सीताशरण दास ने बताया कि सिंहल छुआछूत नहीं मानते थे।

लोगों को इससे दूर रहने की प्रेरणा देते थे। पंजाबी भगवान मंदिर के मणिराम शास्त्री ने बताया कि सिंहल लालापुर के वाल्मीकि आश्रम को भव्य आश्रम बनाना चाहते थे।

जब 2014 में प्रख्यात कथावक्ता रमेश भाई ओझा की कथा का तीर्थक्षेत्र में आयोजन हुआ तो अशोक सिंहल भी वहां आए थे। तब एक उद्योगपति परिवार ने लालापुर में भव्य आश्रम बनाने में सहयोग की बात कही थी और इस पर अशोक सिंहल बहुत खुश हुए थे।

यह दुर्भाग्य रहा कि उनके जीतेजी यह सपना पूरा न हो सका। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष और समाजसेवी पंकज अग्रवाल के घर पर तीन बार अशोक सिंहल चाय पीने पहुंचे थे।
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पंकज ने बताया कि पिछली बार जब आए तो उनके पास समय कम था। उन्होंने उनको स्टेशन फोन कर बुलाया और वहीं चाय पी।
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