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चित्रकूट में घोर अनदेखी: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में तालाबों की नहीं डाली जा रही मिट्टी

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फोटो- 5- भरतकूप के गोंडा गांव में एक्सप्रेस वे के निर्माण में खेतों से लाकर डाली जा रही मिटटी। - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट/भरतकूप। करोड़ों रुपये की लागत से बने रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के साथ तालाबों के गहरीकरण करने के लिए एक्सप्रेस-वे निर्माण मेें तालाबों की मिट्टी का इस्तेमाल करने के लिए घोषणाएं की गई थी। जो हवा हवाई साबित हो रही हैं। भरतकूप क्षेत्र से सड़क का निर्माण शुरू हो गया है। जिसमेें मिट्टी डालने का काम जोरों पर शुरू है। लगभग 10 किमी तक मिट्टी भी डाल दी गई है लेकिन एक भी तालाब से मिट्टी नहीं ली गई बल्कि किसानों के खेतों की मिट्टी खरीद कर डाली जा रही है। जिससे उनके खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाएगी।
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जिले के भरतकूप क्षेत्र के गोंडा गांव से शुरू हाने वाले शिलान्यास करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 फरवरी को आ रहे है। जिसके लिए तैयारियां जोरों पर की जा रही है। वही जब बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी। जिसमेें कहा था कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के समय सड़क के किनारे के तालाबों का गहरीकरण भी किया जाएगा। जिसकी मिट्टी एक्सप्रेस-वे के लिए बन रही सड़क में डाली जाएगी। इसके बाद भी मिट्टी नहीं डाली जा रही है। जबकि मिट्टी डालने का कार्य सड़क मेें जोरो पर है।
अनदेखी करने वालों पर हो कार्रवाई
चित्रकूट। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राम सिंह पटेल, किसान नेता अनिल प्रधान का कहना कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के पहले प्रदेश सरकार के नेताओं ने कहा कि बनाई जाने वाले एक्सप्रेस-वे मेें लगने वाली मिट्टी तालाबों से ली जाएगी। ताकि तालाबों का गहरीकरण हो सके। इसके बाद भी तालाबों से मिट्टी नहीं ली गई। जबकि कुछ किसानों से उनके खेतों की मिट्टी खरीद ली गई है। उसी मिट्टी को डाला जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए और अनदेखी करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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1200 तालाबों का हो चुका है निर्माण
चित्रकूट। बारिश का पानी बेकार न जाए इसके लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 से खेत तालाब योजना का संचालन कर रही है। जिसके तहत किसानोें के खाते में 50 फीसदी अनुदान मेें तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में तीन वर्षों में लगभग 12 सौ तालाबों का निर्माण हो चुका है। किसान इन तालाबों का खेतों की सिंचाई कर आर्थिक समृद्धि का रास्ता तैयार कर रहे है। वही भू जल स्तर भी सुधर रहा है।
दो प्रकार के बनाए जा रहे तालाब
चित्रकूट। कृषि विभाग से संचालित खेत तालाब योजना के तहत दो प्रकार के तालाब बनाए जा रहे हैं। जिसमें तालाब का आकार 22 -20 मीटर और गहराई तीन मीटर होगा। दूसरे श्रेणी के तालाब की लंबाई, 35 मीटर और गहराई तीन मीटर है। वही बडे़ खेत तालाबों की लागत दो लाख 28 हजार 400 रुपये हैं। इसमें किसान को एक लाख 14 हजार 200 रुपये अनुदान दिया जाता है।
चित्रकूट। भरतकूप से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य शुरू होने में सड़क निर्माण का काम करा रहे ठेकेदार पोकरराम ने बताया कि नियम तो तालाब की मिट्टी लेने का है लेकिन आसपास के इलाके में इसके लिए प्रधान व सचिवों ने सहयोग नहीं किया। कुछ जगह तो उनसे मिट्टी निकालने के लिए रुपये की मांग की गई और कई अड़चन आई। जिससे वह सब परेशान होकर आसपास के खेत मालिकों से समझौता कर उनके खेत से मिट्टी लेकर एक्सप्रेस वे बना रहे हैं। नुजूल व हाईवे किनारे की जमीन से मिट्टी लेने की बात को गलत बताया है। उन्होंने बताया कि उनकी गनपत कांटेक्टर को अभी यहां से दो किमी की सड़क बनानी है इसके आगे का ठेका दूसरी कंपनी को मिला है।
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