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स्व. अशोक सिंघल को दिया गया सनातन धर्म रत्न पुरस्कार

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स्व. अशोक सिंघल को मरणोपरांत सनातन धर्म रत्न पुरस्कार उनके प्रतिनिधि को प्रदान करते जगदगुरुरामभ - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। धर्मनगरी के कामतन मोहल्ले में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य और मध्य सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी ने स्व. अशोक सिंघल को सनातन धर्म रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मान में दी गई एक लाख रुपये की धनराशि परिजनों की इच्छानुसार अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण के लिए दे दी गई।
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मध्य सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी के पदाधिकारियों ने विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल को मरणोपरांत 2020 का सनातन धर्मरत्न पुरस्कार दिया। उनके परिजनों के न आ पाने के कारण पुरस्कार विहिप के प्रांत संगठन मंत्री मधुराम को सांकेतिक रूप से दिया गया।
इस दौरान जगद्गुरु ने कहा कि स्व. सिंघल बडे़ दिलेर किस्म के नेता थे। उन्होंने पूरे विश्व में अखंड हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जीवन पर्यंत कार्य किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य के लिए उनके द्वारा किए गए बलिदान अनुकरणीय हैं। सनातन मंदिर चेतना सोसाइटी के सचिव अजय मिश्र ने बताया कि विहिप के वरिष्ठ नेता दिनेश कुमार व चंपत राय के निर्देशानुसार पुरस्कार मधुराम ने प्राप्त किया।
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स्व. सिंघल के परिजनों की इच्छानुसार पुरस्कार की धनराशि विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष दिनेश द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपी जाएगी। इस मौके पर अधर किशोर मिश्रा, अशोक गुप्ता अचानक, विनय मिश्रा, अनिल पांडेय, अनूप अवस्थी, भरत दुबे, ज्ञान प्रकाश त्रिवेदी, विप्लव अवस्थी, राजीव अग्निहोत्री व कौशल किशोर शुक्ला मौजूद रहे।
मंदिर के लिए जिए और मरणोपरांत भी मंदिर को दान
विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. अशोक सिंघल का पूरा जीवन हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अर्पित रहा। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण कराना उनका मुख्य मकसद था। इसके लिए कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनको धमकी भी मिली थी। इसके बाद भी वह विचलित नहीं हुए। मरणोपरांत भी उनके कार्य मंदिर के निर्माण में उपयोग हो रहे हैं। पुरस्कार में मिली एक लाख रुपये की धनराशि भी परिजनों ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए दान में दे दी है।
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