चित्रकूट। सौ साल या उससे भी पुराने वृक्ष अब हमारे धरोहर के रूप में जाने जाएंगे। इस विरासत को सजाने संवारने का काम सरकार ने शुरू किया है। इको टूरिज्म में चित्रकूट के ऐतिहासिक वृक्षों को शामिल किया जाएगा। चित्रकूट में तो एक-दो नहीं पांच सौ साल पुराने वृक्ष होने का दावा किया गया है। जिन्हें रिकार्ड में शामिल किया गया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन से हरी झंडी मिलते ही इन वृक्षों को स्मारक संग्रह के रूप में संवारा जाएगा।
योगी सरकार ने 100 साल से अधिक पुराने पेड़ों को विरासत घोषित किया है। इसके लिए 100 वर्षों से अधिक उम्र पार कर चुके पेड़ों को चयन किया गया है। चित्रकूट जिले में उप्र जैव विविधता बोर्ड लखनऊ की टीम के सदस्यों ने वन विभाग के सहयोग से सर्वे किया है। इसमें चिह्नित 37 पेड़ों में कोटा कंदैला, इटवा बांध व कोलमजरा में पंाच सौ साल पुराने बरगद का दावा है।
बरगढ़ रेंज के कटैयाडांडी में दो सौ वर्ष व डोरिया बारा में करीब तीन वर्ष के उम्र पार कर चुका बरगद का पेड़ मिला है। इसी तरह कर्वी रेंज में कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के पास कामतानाथ पहाड़ में विरजा कुंड के करीब तेंदू के चार पेड़ भी चिह्नित किए गए हैं। इनकी सरकारी तौर पर दो सौ साल से अधिक उम्र है। मानिकपुर रेंज के निही में डेढ़ वर्ष पुराना कटवर का पेड़ लगा है।
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37 पेड़ों की कॉफी टेबल बुक बनाई जाएगी
डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि लखनऊ से आयी टीम अपने स्तर से पेड़ों का सत्यापन कराया है। सभी की सूची शासन स्तर से भेजी गई है। इन पेड़ों के स्थानों को सुंदरीकरण किया जाएगा। चिन्ह्ति किए गए 37 पेड़ों की कॉफी टेबल बुक बनाई जाएगी। इसे उप्र जैव विविधिता बोर्ड लखनऊ के लिए भेजा जा रहा है। सरकार के निर्देश के बाद चिह्नित विरासत वाले वृक्षों को स्मारक के रूप में सजाया संवारा जाएगा।
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ये हैं जिले के चिह्नित विरासत वाले पेड़
जिले में चिह्नित विरासत वृक्षों में धर्मनगरी में परिक्रमा मार्ग वन भूमि में तेंदू के तीन पेड़ लगे हैं। ये 200 वर्ष पुराने हैं। मारकुंडी रेंज में कैंपस के सामने पीपल का वृक्ष, रेलवे स्टेशन परिसर मे पीपल का पेड़, चीतल वन विश्राम गृह परिसर में इमली को पेड़ व महुआ का पेड़, चीतल वन विश्राम गृह के सामने दूसरा इमली का पेड़ है। मानिकपुर वन रेंज में घाटी बरमबाबा स्थल में पीपल का पेड़, कस्बा में जय मां संतोषी आर्य नगर में पीपल का पेड़, मानिकपुर क्षेत्र के डांडी चमरौड़ी के दुर्गा मंदिर, बराहमाफी भवानी दाई मंदिर व बारह माफी गांव में ही चार अलग-अगल स्थानों पर पीपल के पेड़ हैं। मानिक पुर रेंज के ही चुरेह बंजारदाई मंदिर पीपल का पेड़, चुरेह गांव में पीपल का पेड़ लगा है। बरगढ़ रेंज में कलचिहा पौधशाला में कटवर, कटैयाडांड़ी, कोलमजरा, देवरिया में बरगद के पेड़ लगे है। ऊंचाडीह में तीन स्थानों पर पीपल, कोटाकंदैला में पीपल, बरगद, रैपुरा रेंज के सिंहपुर गुंता नदी के पास बरगद, इटवां बांध के पास बरगद, कपूरी गांव में बरगद, मदना में पीपल, गढ़चपा के जंगल में बरगद, गढचपा बरमबाबा स्थल पर पीपल, अगरहुंडा पौधशाला में महुआ, निही चिरैया में कटवर का पेड है।