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Chitrakoot News: कफ सिरप की बिक्री घटी, आयुर्वेद पर बढ़ा भरोसा

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-मिलावट व दुरुपयोग के बाद उपभोक्ताओं ने बनाई दूरी
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- सालाना कारोबार चार लाख से घटकर लगभग एक लाख हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी

चित्रकूट। कफ सिरप में मिलावट और दुरुपयोग की घटनाओं के सामने आने के बाद जिले में इसकी बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगभग 600 मेडिकल दुकानों पर कफ सिरप की बिक्री पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।
जहां पहले एक साल में चार हजार से अधिक बोतलों की बिक्री होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर लगभग एक हजार बोतलों तक सिमट गया है। मेडिकल स्टोर संचालकों के अनुसार, पहले कफ सिरप की मांग बहुत अधिक थी और इसे आसानी से बिना डॉक्टर की पर्ची के भी खरीदा जा सकता था।
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हालांकि, अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप नहीं दी जा रही है, जिससे बिक्री में लगातार कमी आ रही है। कफ सिरप का वार्षिक कारोबार जो पहले चार लाख रुपये से अधिक था, वह अब घटकर लगभग एक लाख रुपये रह गया है।
कफ सिरप में मिलावट और इसके गलत इस्तेमाल की खबरों के बाद से उपभोक्ता इसे खरीदने से कतरा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अब वे खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव के कारण कफ सिरप की मांग में और भी कमी आई है।



आयुर्वेदिक उपचार की ओर बढ़ा रुझान

मिलावट और गलत इस्तेमाल की खबरों के बाद उपभोक्ताओं का मिजाज बदल गया है। लोग अब खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। जिला अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. रवी द्विवेदी के अनुसार, वर्तमान में अस्पताल में खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आयुर्वेदिक उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से लगभग 90 मरीज खांसी व कफ से पीड़ित हैं। पहले यह संख्या प्रतिदिन 30 से 40 के बीच हुआ करती थी। आयुर्वेद में खांसी और कफ के उपचार के लिए तालिसादी चूर्ण और सीतोपलादि चूर्ण जैसी प्रभावी औषधियों का उपयोग किया जा रहा है।



दुकानदार बोले-पहले 50 बिक जाती थीं, अब दो से तीन

फोटो-14-सुशील मिश्रा। संचालक मेडिकल स्टोर

शहर के धनुष चौराहा में मेडिकल स्टोर संचालित कर रहे सुशील मिश्रा ने बताया कि मेडिकल स्टोर में कफ सिरप केवल दो से तीन ही बिक रही है। पहले संख्या 50 तक पहुंच जाती थी। लोग अन्य दवा तो ले जा रहे हैं, लेकिन खांसी को लेकर संशय कर रहे हैं।


फोटो-15-रामकृपाल, नागरिक

कर्वी एलआईसी रोड के रामकृपाल ने बताया कि कफ सिरप में मिलावट व प्रतिबंध होने का पता चला था। अभी हाल में भी खांसी व जुकाम होने पर पहले घरेलू उपचार का सहारा लिया। ठीक न होने पर आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से दवा ली तब आराम मिला।


डॉक्टर के पर्चे के खांसी का सिरप नहीं दिया जा रहा

मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रशासनिक सख्ती और लोगों में बढ़ी जागरूकता के चलते यह बदलाव देखने को मिल रहा है। बिना डॉक्टर के पर्चे के खांसी का सिरप नहीं दिया जा रहा है। इससे मेडिकल कारोबार कफ सिरप को लेकर प्रभावित हुआ है।
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बोले जिम्मेदार-

कोडीन युक्त कफ सिरप बैन होने के बाद कफ सिरप को लेकर लोगों में मानसिकता बदली है। वहीं डॉक्टरों के पर्चे पर ही कफ सिरप दिया जा रहा है। इससे भी दवाओं के बिक्री में कमी आई है। पहले जो बिना किसी डॉक्टर को दिखाए दवा दुकान से कफ सिरप ले आता था, अब बिना पर्चे के नहीं दिया जा रहा है। इससे भी बिक्री में कमी आई होगी।- डी प्रकाश मौर्य, ड्रग इंस्पेक्टर, बांदा-चित्रकूट
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