नोटबंदी हुए 54 दिन बीत चुके हैं लेकिन ग्रामीण बैंकों के हालात अभी भी नहीं सुधरे हैं। पहले दो हजार तो अब चार हजार रुपये की नगदी ही बैंक से दी जा रही है। नए साल के पहले दिन रविवार होने पर आज जब बैंक खुलीं तो लोग लाइन लगाए नजर आए। वेतन निकालने पहुंचे लोगों को भी निराशा हाथ लगी। आरबीआई के नियमों की बात करें तो, हफ्ते में 24 हजार हजार रुपये निकालने की छूट है लेकिन ग्रामीण बैंक इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों की स्थिति कुछ बेहतर है।
शहर सहित ग्रामीण इलाके में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंकों में सरकारी शिक्षकों व कर्मचारियों ने भी अपना खाता खुलवा रखा है। नोटबंदी के बाद से इस बैंक में कैश की समस्या बनी ही रही। पहले दो हजार तक रुपये ही खाता धारकों को दिये जा रहे थे। अब नए साल पर चार हजार रुपये दिए जा रहे हैं। सोमवार को सरकारी कर्मचारी वेतन निकालने के लिए लाइन में लग गए। जब बैंकों के कैश काउंटर पर पहुंचे तो चार हजार रुपये ही मिले।
आरबीआई के नियम बताते हुए खाता धारकों ने इसका विरोध भी किया लेकिन बैंक मैनेजर ने कम कैश की दुहाई देकर शांत कर दिया। वहीं, शिवरामपुर, भाैंरी, भरतकूप, ऐंचवारा, पहाड़ी, मानिकपुर, बरगढ़ व मऊ आदि कस्बों में भी दो से चार हजार रुपये ही कैश दिया जा रहा है।
वेतन भी नहीं निकल पा रहा
सरकारी कर्मचारी प्रदीप तिवारी, सुनील सिंह, ने बताया कि कैश की समस्या के कारण पिछला वेतन भी निकालने में खासी परेशानी हुई थी। दूसरे महीने का भी वेतन आ गया। लेकिन एक बार में चार हजार रुपये निकलने के कारण परेशानी हो रही है। ग्रामीण बैंकों में ज्यादा परेशानी है। दुकानदार चेेक से पेमेंट नहीं ले रहे हैं। स्वाइप मशीन से पेमेंट लेने से भी इंकार करते हैं।
कम कैश मिलने से हो रही परेशानी
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके पात्रा ने बताया कि आरबीआई के नियमों के तहत ही लेनदेन हो रहा है लेकिन हेड आफिस से पर्याप्त कैश न मिलने और प्रतिदिन ग्राहकों की भीड़ होने से परेशानी हो रही है। सबको कैश मिल जाए, इसलिए ग्रामीण बैंकों में नियम बनाया गया है।
लाइन में लगी महिला बेहोश
सोमवार को कस्बे में स्थित यूपी ग्रामीण बैंक में भीषण ठंड में रुपये निकालने के लिए रैपुरवा की मीना देवी पत्नी महेंद्र कुमार लाइन में खड़ी थीं। अचानक वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। यह देखकर हड़कंप मच गया। आनन फानन में महिला को अस्पताल लाया गया। जहां एक घंटे बाद उनकी हालत सामान्य होने पर परिजनों के साथ घर भेजा दिया गया। महिला ने बताया कि कैश निकालने के लिए वह चार दिनों से बैंक के चक्कर लगा रही है। लेकिन कैश नहीं मिल रहा। आज डेढ़ हजार रुपये निकल सके हैं।