चित्रकूट। नोट बंदी के बाद शादी के लिए नोट निकालने के लिए आए नियमों में दुल्हा- दुल्हन के माता पिता उलझकर रह गये हैं। बैंकों में पहुंचने पर अधिकारी रुपये निकालने के इतने नियम बता रहे हैं कि शादी का कार्ड लेकर लोग बैरंग घर लौट जाते हैं।
नोट बंदी के बाद जब केंद्र सरकार ने वैवाहिक कार्यक्रम के लिए ढाई लाख रुपये तक निकालने की छूट दी तो दुल्हा-दुल्हन के परिवार में खुशी छा गई। बड़ी उम्मीद से जब लोग बैंकोें में शादी का कार्ड लेकर रुपये लेने पहुंचे तो उनको बैंक के अधिकारियों ने तमाम नये नियम बताए।
नियमों को सुनते ही सभी के माथे पर पसीना आ गया। शादी के कार्ड व अन्य कागजात की फाइल लेकर लोग अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाने लगे। शादी विवाह की व्यवस्थाओं केा भूलकर सिर्फ नोटों की व्यवस्था के लिए ही सुबह से शाम तक चक्कर लगा रहे हैं।
संगीता देवी पत्नी राम प्रसाद, निवासी देशह की लड़की की शादी है। संदीप वर्मा पुत्र छीतानी निवासी नई दुनिया, रामजी गुप्ता, रामऔतवार निवासी पुरानी बाजार आदि के घरों में शादी है। इन लोगों ने एसडीएम के पास रुपये निकलवाने के लिए आवेदन किया है।
वैवाहिक कार्यक्रम करने के लिए सबसे अधिक गरीब व मध्यम परिवार के सदस्य परेशान हैं। ऐसे परिवार के लोगों की मदद करने के लिए लोग जल्द आगे नहीं आते। इनके रिश्तेदारों के पास भी इतनी रकम नहीं होती कि रुपये दे सके। जबकि उच्चवर्ग व सरकारी नौकरी वालों को कहीं न कहीं से कुछ मदद मिल जाती है।
शादी के लिए धन आहरण में भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों में अधिकतम निकासी ढाई लाख रुपये केवल उन खातों से की जा सकती है। जिन खातों में आठ नवंबर के पहले तक जमा अवशेष था। खाते में केवाईसी की औचारिकताएं पूरी होनी चाहिए। विवाह तिथि 30 दिसंबर के पहले होनी चाहिए। निकासी माता पिता अथवा वर वधू के द्वारा ही किया जाएगा।
यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विवाह के संबध में जिन- जिन व्यक्तियाें को धन का भुगतान किया जा रहा है। उसका किसी बैंक में खाता नहीं हैं। निकासी फार्म के साथ जरूरी कागजात भी देना है। जिसमें उप जिलाधिकारी के द्वारा सत्यापन रिपोर्ट, आवेदन पत्र, विवाह के साक्ष्य के रूप में निमंत्रण कार्ड, मैरिज हाल, हलवाई इत्यादि को अग्रिम भुगतान की रसीद, उन सभी व्यक्तियों का बैंक में खाता न होने का घोषण पत्र जिन्हें बैंक से प्राप्त नगद राशि का भुगतान किया जाना।