सहकारी बैंकों को पांच सौ और एक हजार के नोटों को बदलने और खातों में जमा कराने की रोक से नाराज कोआपरेटिव बैंक के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया। बैंकों के गेट पर ताला लगाकर सुबह से धरना दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को दिया गया।
प्रदेश कोआपरेटिव बैंक इंपलाइज यूनियन के आह्वान पर जिले की प्रमुख शाखा कर्वी सहित शिवरामपुर, भरतकूप, रैपुरा, मऊ, राजापुर, मानिकपुर व पहाड़ी के मैनेजर सहित कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सुबह से बैंकों के ताला नहीं खोले गये। बैंकों के बाहर हड़ताल होने की सूचना चस्पा की गई।
सभी शाखा के मैनेजर व कर्मचारी प्रमुख शाखा कर्वी के गेट के सामने धरना दिया। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को दिया गया। जिसमें कहा गया कि भारत सरकार ने 8 नवंबर को पांच सौ और एक हजार के नोटाें को बंद कर दिया है।
जिसमें रिजर्व बैंक ने आदेश दिया है कि जिला सहकारी बैंकों को करेंसी बदलने व अथवा ग्राहकों के खातों में जमा करने में शामिल नहीं किया गया है। उप्र में 50 जिला सहकारी बैंकाें की 1340 शाखाएं ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में हैं। इन बैंकों में एक करोड़ से अधिक ग्राहक हैं
जिसमें आर्थिक रूप से पिछडे़ किसान, मजदूर और मध्यवर्ग जनता है। एकतरफा निर्देशों से सहकारी बैंक की साख गिराई जा रही है। यह निर्णय पक्षपात पूर्ण एवं अवैधानिक है। कोआपरेटिव बैंक में अधिकतर किसानों के खाता होने से बैंक बंद होने से रुपये निकालने आए किसानों में खासी मायूसी दिखी।
किसान देवी दयाल निवासी बनकट ने बताया कि खेतों में बीज खरीदने के लिए रुपये की जरूरत है। पुराने नोट भी उसके पास नहीं है। इसके अलावा दूसरे बैंक में खाता नहीं है। वही मइयादीन निवासी शंकर बाजार ने बताया कि उसको भी बीज के लिए रुपये की जरूरत है।