चित्रकूट। मानिकपुर ब्लाक अंतर्गत सरैया गांव से 9 किमी दूर स्थित जंगल में खंभेसुर आश्रम कई साल से बना है। जहां पर आसपास घने जंगल के साथ ही कई गुफाएं है। इसमें प्राचीन काल में आदिवासियों द्वारा बनाए गए शैलचित्र बने हैं। जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। कई बार पुरातत्व विभाग की टीम ने निरीक्षण किया लेकिन देखभाल न होने से क्षेत्र के निवासी चिंतित है कि समय रहते इस संस्कृति को सुरक्षित नहीं रखा गया तो शैलचित्र मिट जाएंगे।
मानिकपुर ब्लाक अंतर्गत सरैया गांव से 9 किमी दूर घने जंगल है जहां पर प्राचीन खंभेसुर आश्रम के आसपास कई गुफाएं बनी हुई है। जिसमें प्राचीन काल में आदिवासियों द्वारा बनाए गए शैलचित्रों में मनुष्य के साथ ही पशुओं के कई चित्र बने हैं। खंभे सुर आश्रम की देखभाल 19 साल से संत रामेश्वरदास करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्राचीन स्थल है। यहा पर श्रीराम के पुत्र लव व कुश भी निवास करते थे। ऐसे बताया कि पुरातत्व विभाग ने इस स्थान का निरीक्षण किया है। जिसमें बताया था कि यह शैल चित्र लगभग 20 से 25 हजार वर्ष पुराने है। संत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस प्राचीन धरोहर की देखभाल नहीं की गई तो प्राचीन संस्कृति के शैलचित्र मिट जाएंगे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अवर संरक्षण सहायक सर्किल इंचार्ज सचिन कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में कई स्थानों पर प्राचीन काल की गुफाओं में शैलचित्र बने है। जिनका निरीक्षण समय-समय पर टीम करती रहती है। इसी तरह से क्षेत्र में सरहट ग्राम पंचायत के जंगल भी शैलचित्र बने हैं।
झरना आकर्षण का केंद्र
चित्रकूट। जिस स्थान पर खंभे सुर आश्रम बना है वहां पर एक गुफा में भगवान शंकर का प्राचीन शिवलिंग रखा है। इसके साथ ही एक स्थान से पानी का झरना बहता रहता है। यह झरना कभी बंद नहीं होता। जो प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र बना है।