अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। दंपति की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्हें पता चला कि अब उनके बेटे की तोतली बोली ठीक हो सकती है। खासकर पिता बेहद खुश हुए कि अब बेटा उसे मामा नहीं पापा बोलेगा। हालांकि ऐसा सुनने के लिए उसे कम से कम पांच माह का और इंतजार करना पड़ेगा। यह सब संभव हो रहा है सीएमओ के प्रयास और आरबीएसके टीम क मेहनत की बदौलत।
जिले के कर्वी ब्लाक अंतर्गत घुरेटनपुर के मजरा बगैहा निवासी राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि उसकी पत्नी सुनीता ने आठ साल पहले एक बच्चे को जन्म दिया। बेटे जन्म पर दादी रामबाई, पिता राजेश और माँ सुनीता बहुत खुश हुई। राजेश ने बताया कि जन्म के चार पांच घंटे बाद जब मेरी मां (रामबाई) की नजर बच्चे के मुंह के अंदर गई तो उसका तार (तालू) कटा देख दुखी हो गई। उसने पोते के मुंह में उंगली डालकर तार को छूकर देखा कि कहीं खून तो नहीं बह रहा है। तार कटा जरूर था लेकिन खून बहने जैसी कोई बात न होने पर राहत मिली। यह बात बाद में उन्होंने सभी के सामने रखी।
मां की बात सुनकर सुनीता दुखी हो गई। राजेश ने बताया कि मां के समझाने पर कि तार कटा है लेकिन उससे खून नहीं बह रहा, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इसके साथ मां ने यह कहकर ढ़ाढ़स बंधाया कि बड़ा होने पर बच्चे की किसी अच्छे डाक्टर से दवा कराएंगे। बाद में बच्चे का नाम पुष्पेंद्र रखा गया। राजेश के मुताबिक पुष्पेंद्र पापा को मामा और पानी को मानी बोलता है। परिजनों के मन में पुष्पेंद्र के इलाज की बात पड़ी रही और वह आठ साल का हो चला। इधर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम स्कूल पहुंची। शिक्षक के बताने पर वह राजेश वर्मा के घर पहुंच गई। टीम इंचार्ज डा शशांक पांडे और फिजियोथेरेपिस्ट अधिकारी प्रदीप नामदेव के समझाने पर कि आपरेशन के बाद पुष्पेंद्र अन्य बच्चों की तरह बिल्कुल सही बोलने लगेगा और इसका खर्च में उन्हें नहीं देना पड़ेगा, सरकार अपने खर्चे पर यह इलाज करायेगी। यह बात सुन दंपति और दादी रामबाई मन ही मन अति प्रशन्न हुए।
सीएमओ डा राजेंद्र सिंह ने बताया कि आरबीएसके टीम शिवरापुर ने तालू कटे (क्लेफट पैलेट) केस की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि कानपुर में डा? समीर सक्सेना से बात कर पुष्पेंद्र के परिजनों को वहां भिजवाया। बच्चे का आपरेशन 17 मई 2019 को लीलामणि हास्पिटल कानपुर में कराया गया। उनकी कोशिश है कि सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिले। सीएमओ ने कहा कि आरबीएसके शिवरामपुर टीम अच्छा कार्य कर रही है। आरबीएसके टीम शिवरामपुर के इंचार्ज डा शशांक पांडेय ने बताया कि क्लेफट पैलेट जन्मजात बीमारी है। यह जन्म के समय से रहती है, इसका बाद में आपरेशन कराना ही विकल्प है। इससे संबंधित मरीज को शुद्व और सही उच्चारण करने में दिक्कत आती है। आपरेशन के तकरीबन पांच छह माह बाद संबंधित बच्चा सामान्य बच्चों की तरह सही और शुद्ध उच्चारण करने लगता है। उन्होंने बताया कि अधिकतम दस साल तक के बच्चों के तालू कटे का आपरेशन हो सकता है। इससे अधिक उम्र होने पर आपरेशन के सफल होने की संभावनाएं कम होती जाती हैं।