राजापुर(चित्रकूट)। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर के पास संडवावीर, समोगरी देवी व उरदाइन देवी मंदिर के आस पास पुरा पाषाण काल व ताम्र पाषाण काल के अवशेष मिलना जारी है। रविवार को मंदिर के पास पुरा पाषाणकाल के खुरचनी व पत्थर की बनी कुल्हाड़ी मिली। संडवावीर में लोमड़ी की आकृति का मिट्टी का खिलौना और हस्तनिर्मित मिट्टी की मटकी मिली है।
पुरातत्व विभाग की टीम के विशेषज्ञों का मानना है कि यहां मिल रहे अवशेष ताम्र व नवपाषाण काल के संक्रमण काल को बताता है। रविवार को संडवावीर के पास फिर एक छोटी झोपड़ी मिली है। जिसकी बनावट दरवाजे पर मेड़ या ड्योढ़ीनुमा है। जिससे पानी या अन्य सामग्री घर के अंदर न जा सके। टीम प्रभारी डॉ.शकुंतला देवी मिश्र पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ.अवनीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि इसी स्थान से लोमड़ी की आकृति वाला मिट्टी का खिलौना मिला है। छोटी हस्तनिर्मित मटकी मिली है। जले कंडा व जानवरों की जली हड्डियों के अवशेष मिले हैं वहीं कुछ मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं। जिससे आभास होता है कि जानवरों को भूनकर खाया जाता था। जांच व खुदाई टीम में डॉ. रामनरेश पाल, डॉ. ब्रजेश रावत, बीके खत्री, विरेंद्र शर्मा, राजेश कुमार, शिवप्रेम शामिल रहे।
कुलपति ने मांगी रिपोर्ट, एसपी पहुंचे उत्खनन स्थल
चित्रकूट। गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के पास पुरातत्व विभाग की टीम का उत्खनन धीरे-धीरे लोगों के लिए उत्सुकता बनता जा रहा है। रविवार को डॉ.शकुंतला देवी मिश्र पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो.नीशित राय ने पूरी टीम से पूरी रिपोर्ट मांगी। पुलिस अधीक्षक चित्रकूट प्रताप गोपेंद्र सिंह ने उत्खनन स्थल जाकर जानकारी ली।
नव पाषाण काल की संस्कृति के चिन्ह दिखे
चित्रकूट। डॉ.शकुंतला देवी मिश्र पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ.अवनीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि उरदाइन देवी मंदिर के पास नव पाषाण काल की संस्कृति के चिन्ह दिखे हैं। इसे पुरा पाषाण काल के क्लीवर(खुरचनी) व हैडेस(हस्तकुठार, पत्थर निर्मित कुल्हाड़ी) भी मिली है। समोगरी देवी मंदिर के पास चंदेलकालीन संस्कृति के अवशेष के चिन्ह हैं। जिसका टीम सर्वे कर रही है। फिलहाल इसकी खुदाई का प्रस्ताव अब नहीं है। भारत सरकार पुरातत्व विभाग से अनुमति मिलने पर ही इसकी खुदाई होगी।