चित्रकूट। धर्मनगरी में रामलीला का बिगुल बज चुका है, मंच सजने को तैयार है, लेकिन रामलीला की व्यवस्था राम भरोसे ही है। शहर के दो सबसे बड़े मंच है।
एक नई बाजार के रेलवे स्टेशन वाला रामलीला मैदान तो दूसरा पुरानी बाजार के धुस मैदान का रामलीला भवन। दोनों ही बदहाल हैं। हर साल जहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहां अबकी बार कीचड़, गड्ढे और टपकती छतें उनका स्वागत करेंगी।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। रेलवे स्टेशन के पास रामलीला मैदान में रोज दो से तीन हजार श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है, लेकिन यहां तक पहुंचना ही किसी चुनौती से कम नहीं। सड़क पूरी तरह उबड़-खाबड़ है, जगह-जगह गहरे गड्ढे। सूखे में धूल और बारिश में कीचड़, दोनों में श्रद्धालुओं को जूझना पड़ता है।
मैदान में मंच तो खड़ा कर दिया गया है, कलाकारों के सिर पर टिन की चादर डाल दी गई है, लेकिन हजारों दर्शकों के लिए बैठने तक का इंतजाम नहीं। बारिश हुई तो न कलाकार बचेंगे, न दर्शक। स्थानीय अमर सिंह, जयनारायण और भोला प्रसाद बोले कि बरसों से यहां रामलीला हो रही है, पर हर बार की तरह इस बार भी इंतजाम भगवान भरोसे हैं।
धुस मैदान के भवन में चल रही लीला
पुरानी बाजार के धुस मैदान में बना रामलीला भवन तो और भी बदहाल है। अंदर लीला शुरू हो चुकी है, लेकिन छत ऐसी कि हल्की बारिश में भी टपकने लगती है। भवन छोटा है, इसलिए मुख्य आयोजन बाहर मैदान में करना पड़ता है। ऐसे में बारिश आई तो आयोजन करना मुश्किल होगा। अंदर जाकर देखा तो टेंट और सामान बिखरा पड़ा था, मैदान में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं। बदइंतजामी का आलम यह कि भवन खुद ही मदद मांग रहा है।
वर्जन
पुरानी बाजार स्थित रामलीला भवन को नई सिरे से बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। पर्यटन मंत्री द्वारा स्वीकृत भी हो गया है। जल्द इसपर काम भी शुरू होगा। इसके साथ स्टेशन रोड को लेकर प्रस्ताव गया है। यह भी जल्द बनेंगी।- नरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, नगर पालिका ।
सीकेटीपी-11- स्टेशन रोड की उबड़-खाबड़ सड़क। संवाद
सीकेटीपी-11- स्टेशन रोड की उबड़-खाबड़ सड़क। संवाद