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मंदाकिनी की पवित्रता को ख्ातरा

Sun, 01 Feb 2015 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट।
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मंदाकिनी की पवित्रता को अंधविश्वास का ग्रहण लगता जा रहा है। सूरजकुंड में शव उतरा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यहां शवों को प्रवाहित करने से सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन इस अवधारणा के चलते मंदाकिनी नदी प्रदूषित होती जा रही है।
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जिला मुख्यालय से लगभग पांच किमी दूर और बेड़ी पुलिया के दक्षिण में करीब तीन किमी दूरी पर सुरम्य स्थान सूरज कुंड है। मंदाकिनी नदी यहां से आगे बंधोइन होकर जमुना नदी में मिलती है। यहां पर इस नदी को सूरज कुंड नाम दिया गया है।

सूरज कुंड में इस समय कई शव उतरा रहे हैं। घाट के किनारे पड़े कपड़े और घड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहां अंतिम संस्कार के नाम पर शवों को जल प्रवाहित कर दिया जाता है।
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सूरजकुंड के मंदिर के बड़े महंत रामचरण दास ने बताया कि किसी की अकाल मौत होने पर लोग यहीं पर सभी कर्मकांड कर पत्थर में शव बांध कर डाल जाते हैं।

 उनका मानना है कि इससे मृतक को मोक्ष मिल जाता है। इस संबंध में उन्होंने कई बार लोगों को जागरूक करने की कोशिश की और प्रशासन को भी बताया पर कोई फायदा नहीं हुआ। जब मंदाकिनी नदी का प्रवाह तेज था तो ये शव विशाल जमुना नदी में चले जाते थे। जब से बांध का निर्माण हो गया, शव यहीं उतराते रहते हैं। इससे नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह लोगों को इस संबंध मेें जागरूक करे।

यहां सूर्य देव से मिले थे राम
सूरज कुंड की मान्यता बहुत है। लोग हर पर्व में यहां स्नान करके खुद को पुण्य का भागी मानते हैं। सूरजकुंड के बड़े महंत रामचरण दास ने बताया कि मान्यता है कि जब भगवान राम चित्रकूट आए थे तो सूरज देवता से यहीं मिले थे। उनके अनुसार, यहां के कुछ पत्थरों में झुलसने के निशान भी हैं, जो सूरज के रथ के पहियों के माने जाते हैं।

डीएम का वादा कब होगा पूरा
महंत ने बताया कि कुछ दिनों पहले यहां कमिश्नर और डीएम आए थे। जिलाधिकारी नीलम अहलावत ने मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए यहां शवों को प्रवाहित करने से रोकने को स्थायी कदम उठाने का वादा किया था। इस संबंध में उनसे लिखित रूप में पत्र देने को भी कहा था।
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