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Chitrakoot News: सत्यापन के नाम पर 5000 पेंशनरों की रोकी नवंबर माह की पेंशन

Mon, 03 Nov 2025 11:04 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। कोषागार में हुए पेंशन घोटाले में नामजद 93 पेंशनरों की पेंशन पर तो पहले ही रोक लगा दी थी, लेकिन सत्यापन के नाम पर नवंबर माह में पांच हजार पेंशनरों की पेंशन रोक दी गई। विभाग ने जीवित प्रमाणपत्र देने के लिए इन्हें एक माह की मोहलत तो दी है मगर जिस रफ्तार से सत्यापन हो रहा है, उससे यह लगता नहीं, कि यह सत्यापन कार्य एक माह में पूरा हो पाएगा। इससे इन पेंशनरों के सामने दुश्वारियां बढ़ सकती हैं। बैंक से विभाग की ओर से रोक लगी होने की बात कहकर टरका दिया जा रहा। हालांकि विभाग के अधिकारी अक्तूबर माह की पेंशन भेजे जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन कई पेंशनर खाते में रुपये न आने से परेशान हैं।
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जिले के सभी पेंशनधारकों के खातों की जांच हो रही है। विभाग ने जीवित प्रमाणपत्र मांगा है तो सभी कागजात पहुंचा रहे हैं लेकिन अभी माह अक्तूबर व नवंबर की पेंशन उनके खाते में नहीं पहुंची है। तरौंहा की मैकी देवी ने बताया कि उसे तो दो माह से पेंशन नहीं मिली है। उसके पति केदारनाथ शिक्षक थे जिनका निधन होने के बाद पेंशन उसके खाते में आती है। दो माह से कोई पेंशन नहीं आई। बताया कि वह चार दिन से बैंक जाती है तो वहां से कहा जाता है कि विभाग से रोक लगी है।
कोषागार विभाग जाने पर बताया जाता है कि उसके खाते में सितंबर अक्तूबर माह की पेंशन भेजी जा चुकी है। पेंशन की धनराशि न मिलने से उसे आजीविका में परेशानी हो रही है। पूरे मामले में वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि अक्तूबर माह की पेंशन रोकी नहीं गई है। सिर्फ 93 नामजदों की पेंशन रोकी है। इसके अलावा नवंबर माह की पेंशन अभी सभी की रुकी है। जांच जारी है जीवित प्रमाणपत्र व अन्य कागजातों का मिलान करने के बाद 93 के अलावा अन्य सभी की पेंशन जारी की जाएगी।
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एसआईटी ने 12 पेंशनर व बिचौलियों से पांच घंटे की पूछताछ
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। कोषागार विभाग के 43.13 करोड़ के घोटाले में एसआईटी जांच में जुटी है। सोमवार को टीम ने 12 पेंशनर व बिचौलियों से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की, लेकिन किसी को जेल नहीं भेजा गया है। रिकवरी की रफ्तार भी धीमी रही। पेंशनरों के खाते में लेन देन की रकम व भेजने की प्रक्रिया का मिलान कराया गया।
सोमवार को पेंशन घोटाले की जांच में एसआईटी के सामने 12 पेंशनर व बिचौलिए पेश हुए। लगभग पांच घंटे की पूछताछ के दौरान उनके खाते के संचालन के बारे में पूछा गया। ज्यादातर पेंशनरों ने बताया कि उनके रिश्तेदार व गांव के परिचित लोग ही लालच देकर खाते का संचालन करते थे। उनके हस्ताक्षर युक्त चेक ले जाकर बैंक से भुगतान लाकर 20 प्रतिशत उन्हें हिस्सा देते थे। पहाड़ी के पेंशनर के साथ आए किशोरी लाल ने बताया कि उसकी मां घर में अकेले रहती थीख् वह सब राजापुर में रहते हैं। ऐसे में गांव के एक परिचित ने भरोसा जीतकर मां की पेंशन निकालने का काम करता था। इस घोटाले में नामजद होने के बाद मामले की जानकारी हुई। अब वह बिचौलिया ढूंढे नहीं मिल रहा है। पुलिस को इसकी जानकारी दी है, लेकिन पुलिस का कहना है कि उसे ढूंढकर लाओ और खाते में दर्शाई गई राशि 25 लाख के जमा करने का इंतजाम करो। एक सप्ताह का समय मांगने पर पुलिस ने रिकवरी कराने की शर्त पर छोडा है।
एसआईटी प्रभारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा व जांच अधिकारी अजीत पांडेय ने बताया कि दस और संदिग्धों की जानकारी मिल रही है। इसमें ब्यूर गांव का एक युवक और पहाड़ी क्षेत्र के दो युवक के नाम सामने आए हैं। इनके घर तलाश में पुलिस भेजी गई है। 12 पेंशनरों के खाता में आने वाली राशि और निकासी के समय सीसीटीवी फुटेज से उनके चेहरे का मिलान कराया जा रहा है। पूछताछ में यह भी देखा गया कि पेंशनर के समानांतर अन्य खातों के संचालन का आंकडा एकत्र किया गया है। सोमवार को किसी को जेल नहीं भेजा गया है।
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कुछ और पर गाज गिरना तय
शासन को भेजी गई पहली जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों व कर्मचारियों से सांठगांठ का जिक्र है। इससे यह तय माना जा रहा है कि अभी कुछ और अधिकारी कर्मचारी पर गाज गिरेगी।
इस मामले में सहायक कोषाधिकारी विकास सचान व एकाउंटेंट अशोक वर्मा को जेल भेजा गया है। दोनों निलंबित भी इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर किए गए हैं। विभागीय अन्य नामजदों में सहायक कोषाधिकारी संदीप श्रीवास्तव का जांच के दौरान मौत हो चुकी है। एक अन्य रिटायर्ड सहायक कोषाधिकारी अवधेश प्रताप सिंह की पुलिस तलाश कर रही है। जब से वह नामजद हैं, पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर पाई है। दो बार उन्हें स्वास्थ्य खराब होने से पुलिस ने रियायत दी, लेकिन अब वह पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि शासन स्तर से अन्य किसी कार्रवाई की फिलहाल उनके पास कोई सूचना नहीं आई है।( संवाद)

15 लाख की रिकवरी

चित्रकूट। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि शिव प्रसाद ने 15 हजार, गिरजा प्रसाद ने 14 हजार, बिट्टी देवी ने 2.50 लाख, बलवंत ने 8.72 लाख 224 रुपये, सावित्री 3.50 लाख की रिकवरी हुई है। सोमवार को कुल 15,01, 224 रुपये की रिकवरी हुई है। अबतक कुल रिकवरी राशि 3 करोड़ 34 लाख 99 हजार 516 है। (संवाद)
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