चित्रकूट। धार्मिक नगरी चित्रकूट को पर्यटन के मानचित्र पर चमकाने के लिए सरकार ने पिछले बारह वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन श्रद्धालुओं को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक 23.92 करोड़ रुपये और अप्रैल 2017 से मार्च 2024 तक 212.40 करोड़ रुपये, यानी कुल 236.32 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं पर खर्च किए गए। बावजूद इसके, न तो कामदगिरि परिक्रमा मार्ग दुरुस्त हो पाया है और न ही पेयजल व शौचालय जैसी सुविधाएं सुधर सकी हैं।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पर्यटन विभाग ने इस अवधि में एक के बाद एक बड़ी योजनाएं शुरू कीं। इनमें रामघाट की फसाड लाइटिंग 88.56 लाख, डिजिटल रामायण गैलरी 9.04 करोड़, रामघाट पर लेजर शो 6.80 करोड़, तुलसी स्मारक का पर्यटन विकास 1.30 करोड़, राजापुर में तुलसी पीठ का कार्य 21.29 लाख, वाल्मीकि आश्रम में 125 फीट ऊंची प्रतिमा 1.84 करोड़, कामदगिरि परिक्रमा मार्ग विकास 4.01 करोड़, सीतापुर व रामनगर क्षेत्र का पर्यटन विकास 73.62 लाख व 4.45 करोड़, बोटिंग, ईको-टूरिज्म स्थापनाएं, आरती स्थल का निर्माण 21.60 लाख और शेड 14.41 करोड़ जैसे कार्य शामिल हैं। इन सब पर खर्च का आंकड़ा हर साल बढ़ता गया, लेकिन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि जमीनी हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आता।
श्रद्धालुओं की परेशानी
परिक्रमा करने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि मार्ग जगह-जगह टूटा पड़ा है। बारिश के दिनों में फिसलन से हादसे का खतरा बना रहता है। साफ-सफाई का अभाव और पेयजल व्यवस्था न होना बड़ी समस्या है। छतरपुर से आई श्रद्धालु सीता देवी ने कहा कि महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं हैं, मजबूरी में लोगों को खुले में जाना पड़ता है। प्रयागराज से आए रामकिशोर ने कहा कि वे हर साल यहां आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजनाएं सिर्फ रिपोर्ट और फाइलों में पूरी होती हैं। एक बुजुर्ग साधु ने भी तंज कसते हुए कहा कि यदि सचमुच इतना पैसा खर्च हुआ होता, तो आज परिक्रमा मार्ग विदेशों के तीर्थ स्थलों जैसा चमकता।
स्थानीय लोगों की नाराज़गी
चित्रकूट के दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि योजनाओं का रुपया कहां खर्च हो रहा है, इसका लाभ जमीनी स्तर पर नजर नहीं आता। कानपुर से आए पंकज तिवारी ने सवाल उठाया, जब सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं तो श्रद्धालुओं को पीने के पानी की सुविधा तक क्यों नहीं मिल रही। श्रद्धालुओं ने हालात पर नाराजगी जताई। रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि नंगे पांव कीचड़ में चलना पड़ता है। सावित्री देवी का कहना था कि बुजुर्गों के लिए यह रास्ता बेहद कष्टदायी है। आशुतोष मिश्रा ने शिकायत की कि वाटर कूलर खराब पड़े हैं, जबकि शंकरलाल तिवारी ने शौचालयों की हालत को शर्मनाक बताया। राजेश गुप्ता बोले कि करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन हालात जस के तस हैं।
इनसेट
योजनाओं पर खर्च
2012-2017 : 23.92 करोड़, 2017-2024 : 212.40 करोड़, कुल खर्च : 236.32 करोड़
वर्जन
इस वर्ष पर्यटन के लिए 50 करोड़ रुपये मिलना प्रस्तावित है। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें प्रमुख मार्गों पर गेट व साइनेज बोर्ड के साथ ही अन्य विकास करना शामिल है।
- आरके रावत, जिला पर्यटन अधिकारी