चित्रकूट। जीपीएस-युक्त वाहनों की कमी से जिले में सरकारी केंद्रों पर खरीदी गई धान की उठान में गंभीर समस्या बन गई है। जीपीएस से लैस वाहन न मिलने से गोदामों में धान का अंबार लग रहा है। उठान न होने से खरीद केंद्रों पर जगह की कमी होने लगी है। जल्द ही इसका समाधान नहीं हुआ तो धान को खुले में रखने की नौबत आ सकती है, जिससे नुकसान की आशंका है।
जिले में वर्तमान में धान खरीद के लिए 14 केंद्र संचालित हैं। इनमें शहर के गल्ला मंडी में दो केंद्र, जबकि पहाड़ी, मानिकपुर, बसिला, बरगढ़, ऐचवारा, गाहुर, हरदौली, खंडेहा, परसौजा और रामनगर जैसे क्षेत्रों में भी धान की खरीद की जा रही है। इन सभी केंद्रों पर खरीदी गई धान को गोदामों में डंप किया जा रहा है, लेकिन ट्रकों में जीपीएस न होने के कारण इनका उठान संभव नहीं हो पा रहा है।
शहर के गल्लामंडी स्थित विपणन शाखा के प्रभारी विनय मिश्रा ने बताया कि पिछले साल से ही प्रशासन ने यह नियम लागू किया है कि गोदामों से धान की ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धान की ढुलाई करने वाले ट्रक की पल-पल की जानकारी मिल सके। हालांकि, धान की ढुलाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और उनके ट्रकों में जीपीएस नहीं लगा है। इस कारण, उन्हें गोदामों से धान देने से मना कर दिया गया है। जब तक ठेकेदार जीपीएस युक्त वाहन उपलब्ध नहीं कराते, तब तक धान का उठान नहीं हो पाएगा। विपणन शाखा ने अब तक 127 किसानों से सात हजार 434 क्विंटल धान खरीदा है, जो गोदामों में ही जमा है।
इसी तरह, गल्लामंडी में एक अन्य केंद्र के प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने 70 किसानों से 4 हजार 500 क्विंटल धान खरीदा है और यह भी गोदाम में ही रखा है। गोदामों से धान की ढुलाई नहीं हो पा रही है। ठेकेदारों से बार-बार कहा गया है कि वे जीपीएस लगाकर ही वाहन भेजें, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे अगले दो दिनों में इस समस्या का समाधान कर देंगे।
-
जिले के खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा ने इस मामले पर कहा कि शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि धान की ढुलाई करने वाले ट्रकों में जीपीएस लगाना अनिवार्य है। इस नियम का पालन करवाना आवश्यक है।