घटना के बाद विवेचक ने महिला सिपाही के जरिए पीड़िता का बयान दर्ज कराया था। इसमें पीड़िता ने स्पष्ट कहा था कि रामलीला देखकर लौटने के बाद अहिरनपुरवा कर्वी निवासी सुधीर कुमार व शंकर ने उसका मुंह दबाकर जबरन बाइक से ले गए।
इसके बाद तमंचा दिखाकर सुधीर ने उसके साथ गलत काम किया और 15-20 मिनट बाद उसे गल्ला मंडी में छोड़ने के बाद दोनों भाग गए थे। पीड़िता द्वारा यह बयान दिए जाने के बाद भी विवेचक द्वारा पीड़िता का धारा 164 का कथन अंकित नहीं कराया गया।
पुलिस ने पीड़िता के भाग जाने का हवाला देते हुए लगभग डेढ-दो साल बाद पीड़िता की मां के बयान के आधार पर न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इन तथ्यों का अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी ने इस मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम आख्या को समाप्त कर फिर विवेचना के आदेश कर्वी कोतवाली को दिए हैं।
साथ ही इस मामले में विवेचना करने वाले कर्वी के दो तत्कालीन सीओ सदर विजेंद्र द्विवेदी और रजनीश कुमार यादव के विरुद्ध आईपीसी की धारा 166ए(ख) व धारा 4 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अन्तर्गत अभियोग पंजीकृत किए जाने के आदेश दिए हैं।