फोटो 14 सीकेटीपी 11 कल्याण मंडल का निर्माण बंद। संवाद
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चित्रकूट। नगर विकास विभाग की एक महत्वाकांक्षी योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। गरीब परिवारों की शादी के लिए चित्रकूट में पांच करोड़ रुपये से बनने वाला कल्याण मंडपम अब अधिकारियों की लापरवाही का स्मारक बनकर खड़ा है। वजह, जिम्मेदारों की बड़ी चूक है। कार्यदायी संस्था ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से अनिवार्य एनओसी लिए बिना ही निर्माण शुरू करा दिया और अब पुरातत्व विभाग की आपत्ति के बाद काम महीनों से ठप पड़ा है।
चित्रकूट धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। यहां के 100 से 300 मीटर के दायरे को एएसआई ने रेगुलेटेड जोन घोषित किया है। नियम के मुताबिक, इस दायरे में किसी भी पक्के निर्माण से पहले एएसआई से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन कार्यदायी संस्था ने इस सबसे जरूरी प्रक्रिया को ही नजरअंदाज कर दिया और सीधे निर्माण शुरू करा दिया।
इसकी भनक लगते ही एएसआई के अधिकारियों ने पहले मौखिक तौर पर काम रोकने को कहा, लेकिन बात नहीं मानी गई। इसके बाद विभाग ने तीन बार लिखित नोटिस जारी कर निर्माण कार्य को पूरी तरह से रुकवा दिया। तब से करीब आठ महीने से निर्माण बंद है। निर्माण स्थल पर सन्नाटा पसरा है।
स्थानीय लोगों अजीत सिंह और जानकी सिंह का कहना है कि कल्याण मंडपम बनने से गरीब परिवारों को सस्ते दर पर शादी-विवाह के लिए स्थान मिलता। वहीं, कार्यदायी संस्था का दावा है कि पुरातत्व विभाग से अनुमति के लिए आवेदन किया गया है और जल्द ही एनओसी मिल जाएगी, जिसके बाद काम में तेजी लाई जाएगी। इस प्रकरण में डीएम पुलकित गर्ग की फटकार के बाद अब कार्यदायी संस्था हरकत में आई है।