चित्रकूट। 29 और 30 अगस्त 2026... ये दो दिन चित्रकूट कभी नहीं भूल सकता। जब मां मंदाकिनी ने अपना रौद्र रूप दिखाया तो आधा शहर पानी में समा गया।
अब इसी अतिक्रमण पर नगर परिषद चित्रकूट मध्य प्रदेश ने मंदाकिनी के किनारे मकान बनाने और प्लॉटिंग पर पाबंदी लगा दी है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमित सोनी ने आम सूचना जारी कर साफ कर दिया है कि मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग, भूमि विकास और भवन निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
उन्होंने कहा है कि इन क्षेत्रों में किसी भी निर्माण से पहले सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना नक्शा पास कराए कॉलोनी काटना या मकान बनाना अवैध माना जाएगा। नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
मंदाकिनी नदी चित्रकूट की जीवनरेखा मानी जाती है। यह लगभग 70 फीसदी आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराती है। नदी सिंचाई के लिए भी महत्वपूर्ण जल स्रोत है। हालांकि, यह नदी गंभीर प्रदूषण और अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। शहर के कई गंदे नाले सीधे इसमें मिलते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
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महायोजना 2031 में संरक्षित होगी मंदाकिनी
इन चिंताओं को दूर करने के लिए महायोजना 2031 के तहत एक प्रस्ताव है। नदी के दोनों किनारों पर 100 मीटर चौड़ा हरित गलियारा विकसित किया जाएगा। इस योजना में नदी के किनारों पर पौधे रोपे जाएंगे, जिससे प्राकृतिक सुंदरता बढ़ेगी। वन विभाग के अनुसार, हरित पट्टी से भू-कटाव रुकेगा और भूजल पुनर्भरण होगा। यह तापमान कम करने और प्रदूषण व मृदा क्षरण को घटाने में भी सहायक होगा।