चित्रकूट। देश में जहां एक तरफ बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ को लेकर सरकार बढ़ावा दे रही है। वहीं तीन मासूम बालिकाओं को माता-पिता ने छोड़ दिया है। जिनका पालन पोषण उनका वृद्ध नाना करने को मजबूर हैं। जो खुद अवस्था के चलते इस समय चलने फिरने के लिए मोहजात हो जाते हैं। तीनों मासूम को लेकर नाना इनकी परवरिश सही तरीके से कराने की गुहार लगा रहा है।
शहर के तरौंहा फरासन टोला मोहल्ला निवासी मुन्ना पुत्र स्व बल्दू गरीब परिवार से है जिसने अपनी पुत्री केशकली की शादी 18 वर्ष पहले नत्थू पुत्र कृपाली निवासी ग्राम पवैया थाना बिसंडा जिला बांदा में की थी। पति पत्नी चित्रकूट तीर्थ स्थल में राममोहल्ला में रहते थे। इनकी तीन पुत्रियां है। जिसमें रेश्मा देवी (7),चांदनी (5) व अंजू देवी (2) हैं। वृद्ध ने बताया कि उसकी पुत्री भी तीनों बेटियों को छोड़कर कहीं चली गई। जो लगभग एक साल बाद आज तक लौटी नहीं। कुछ माह बाद उसका दामाद भी बिना बताए कहीं चला गया।
तब से तीनों मासूम बच्चियों को वृद्ध नाना नत्थू पुत्र स्व. बल्दू निवासी तरौंहा फरासन टोला पालन पोषण कर रहा है। उसकी आयु इस समय लगभग 75 वर्ष से भी अधिक हो गई। जिससे वह बालिकाओं का पालन पोषण करने में असमर्थ हो रहा है। बालिकाओं के दो मामा भी जिले के बाहर मजदूरी करते है वह भी बालिकाओं को रख नहीं रहे है। उसका कहना कि यदि उसकी मौत हो गई तो बालिकाओं को पालन पोषण कौन करेगा। इस संबंध में वृद्ध ने बताया कि वह कोतवाली से लेकर महिला आयोग की सदस्य तक से इन तीनों का लालन पालन कराने के लिए सुरक्षित व्यवस्था कराने की मांग की है।
बच्चियों के भविष्य के लिए शहर के सर्वोदय सेवा आश्रम की चाइल्ड लाइन की तरफ से भी अधिकारियोें को अवगत कराया गया कि इन तीन बालिकाओं के भविष्य के लिए कुछ किया जाए। इसके बाद भी आज तक कुछ किया नहीं गया।