खोही(चित्रकूट)। धर्मनगरी में चल रहे शरदोत्सव कार्यक्रम के अंतिम दिन मुंबई के प्रसिद्ध गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने फिल्मी गीताें के माध्यम से समा बांध दिया। उन्होंने गीत की शुरूआत खोया मेरा दिल है, मैं रोऊं या हंसू करूं तो क्या करूं से शुरू किया। दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। शदरोत्सव कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक कार ने कई फिल्मी गीत गाए वादा रहा सनम हमारी चाहतों का मिट न सकेगा फसाना सनम, ओ मांझाी रे गीत गए। इसके बाद दर्शकों के फरमाइश पर कई गीत गाए। उन्होनें बीच-बीच में दर्शकों का मनोरंजन भी किया। चांद की रोशनी में लगाकार तो घंटे तक कार्यक्रम चला।
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गीत सुनने की बजाय नृत्य देखने की परंपरा
चित्रकूट। प्रसिद्ध कलाकार अभिजीत भट्टाचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भट्टाचार्य ने गायन के बारे में बोलते हुए कहा कि गीतों को आज देखने की परंपरा है जब कि गाना सिर्फ सुना जाता है। उस समय में मेरा गुरु मर्फी रेडियो था। उसी से मैंने लता को सुना है, किशोर दा को सुना है। उनसे बेहद प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि नानाजी ने इस पिछडे क्षेत्र के विकास में अपना अद्वितीय योगदान दिया है। चित्रकूट के धार्मिक स्थानों का दर्शन करने करने पर शांति मिली है।
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श्रेष्ठ पुरुषों के व्यक्तित्व से आने वाली पीढ़ी को मिलता मार्गदर्शन
- केद्रीय मंत्री विजय गोयल ने शदोत्सव कार्यक्रम का किया समापन
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में चल रहे शरदोत्सव कार्यक्रम का समापन भारत सरकार के सांख्यिकी एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने किया। उन्होंनें कहा किश्रेष्ठ पुरुषों के कृतित्व और व्यक्तित्व से आने वाली पीढ़ी मार्गदर्शन लेकर सही मार्ग पर चलती है। नानाजी जब तक राजनीति में रहे तब तक उनका यही कहना था कि ईमानदारी से काम करो। नानाजी के कृतित्व ने भगवान राम की तपोस्थली एवं वन प्रांतर अंचलों में चैतन्यता जगाने का काम किया है। उनकी ऊर्जा और प्रेरणा से उनके बताए मार्ग पर क्षेत्र का उत्थान किया जा सकता है। कार्यक्रम में मप्र सरकार मंत्री ललिता यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि शरदोत्सव कार्यक्रम मे देश के कई प्रांतों के कलाकारों ने अपना अभिनय प्रस्तुत किया है। जिससे इस पिछडे़ क्षेत्र के लोगों को देखने का अवसर मिला है। इस तरह के कार्यक्रम धर्मनगरी में होते रहना चाहिए। इस मौके पर कामदगिरि पीठ के मदनगोपाल दास जी महाराज,ललिताम्बा पीठ के पीठाधीश्वर जयराम दासजी महाराज,रामायणी कुटी के महंत रामह्रदय दास, महंत दिव्यजीवनदास महाराज मौजूद रहे।