खोही(चित्रकूट)। यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित मंदाकिनी नदी में मिली अष्टधातु की बेशकीमती मूर्ति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बांदा चित्रकूट के सांसद समेत धर्मनगरी के साधु संतों ने भी पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सभी का कहना है कि जो निर्णय होना हो जल्द हो और मूर्ति को जिस मंदिर की हो वहां स्थापित करा दी जाए।
लगभग 12 दिन पूर्व मंदाकिनी नदी में सफ ाई करते समय कुछ नाविकों को भगवान की एक मूर्ति मिली थी। इस मूर्ति के बारे में बताया गया कि यह बेशकीमती अष्टधातु की है और इसमें आंख हीरे की लगी है। आरोप है कि इसकी जानकारी नयागांव थाना जिला सतना मप्र पहुंचने पर तत्कालीन थाना प्रभारी आशीष धुर्वे ने इसे थाने में ही रख लिया। चित्रकूट सांसद आरके सिंह पटेल ने बताया कि कुछ नाविकों ने उन्हें फोन कर इस मामले की जानकारी दी। इसके बाद जांच शुरू हुई।
नाटकीय ढंग से मूर्ति सोमवार को बरामद दर्शायी गई। थाना प्रभारी आरबी त्रिपाठी ने बताया कि एक नाविक ने थाने में लाकर इस मूर्ति को दिया था। जिसकी लिखा पढ़ी कर दी गई है। अब मूर्ति पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की टीम जांच कर बताएगी कि इसकी क्या विशेषता है। सांसद आरके पटेल ने कहा कि जिस मंदिर की मूर्ति हो वहां इसे स्थापित करा दिया जाए। कामदगिरि मंदिर के प्रमुख संत मदनगोपाल दास ने कहा कि पुलिस की भूमिका संदेहास्पद है। मूर्ति प्रकरण में कुछ गड़बड़ी की जा रही है। भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास ने कहा कि पुलिस इसे सही तरीके से नहीं बता रही है।