दीपदान के दौरान धर्मनगरी के राघव घाट का सुंदर आकर्षक नजारा व जगमग मंदाकिनी। संवाद
- फोटो : दीपदान के दौरान धर्मनगरी के राघव घाट का सुंदर आकर्षक नजारा व जगमग मंदाकिनी। संवाद
चित्रकूट/खोही। भगवान श्रीराम की तपोभूमि आस्था, परंपरा और श्रद्धा के दीपों से जगमगा उठी। मेला के पांचवें दिन धर्मनगरी दीपों से जगमगा उठी। अयोध्या की तरह तपोभूमि की दीपावली और भी ऐतिहासिक रही।
30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी किनारे दीपदान कर सुख और मंगल की कामना की। इस बार अमावस्या दो दिन मानी है। इससे दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंंचे। मंदाकिनी नदी में स्नान किया। रामघाट व नदी किनारे दीपदान किया। दीयों की रोशनी व लाइटों की सजावट से मंदाकिनी नदी रोशनी से सराबोर हो गई। श्रद्धालु रामसजीवन ने बताया कि यह मेला अविस्मरणीय रहा।
महंत दिव्यजीवनदास ने बताया कि दीपमालिका त्रेता युग की परंपरा रही है। जब वनवास काल में माता सीता ने अयोध्या की रात दीप जला कर चित्रकूट को आलोकित किया था। जब वनवास काल में माता सीता ने अमावस्या को दीप जलाकर चित्रकूट को आलोकित किया था। यही परंपरा जन-जन के ह्दय में जीवित है।