ग्राम रोजगार सेवक संघर्ष समिति की अगुवाई में जिले में रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया। इनका कहना था कि सरकार के आश्वासन देने के बाद भी उन लोगों को राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा।
ग्राम रोजगार सेवक संघर्ष समिति की जिला इकाई के अध्यक्ष गौरीशंकर यादव की अगुवाई में गुरुवार को प्रदर्शन कर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। गौरीशंकर ने बताया कि 25 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास पर सीएम की समिति से प्रतिनिधि मंडल से वार्ता हुई थी।
इसमें उन्होंने आश्वस्त किया था कि तीन दिसंबर 14 तक रोजगार सेवकों के विनियमितीकरण पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा पर ऐसा नहीं किया गया। सरकार के रवैये से दुखी होकर प्रदेश के तमाम रोजगार सेवकों ने एक जून 2015 से लखनऊ के रामलीला मैदान में आमरण अनशन किया था।
इसके बाद सीएम के विशेष सचिव रिग्जियान सैंफिल ने चार जून को आश्वस्त किया कि दस दिन में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, प्रमुख सचिव वित्त से रिपोर्ट प्राप्त कर सीएम को निर्णय के लिए दिया जाएगा। रोजगार सेवकों का कहना है कि इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।