सूखे के दौर में मंदाकिनी नदी में भरा पानी क्षेत्रीय वासियों को राहत दे रहा है। ऐसे में शुक्रवार को अचानक फाटक खोल दिया गया। जिससे मंदाकिनी घाट का आधा पानी बह गया। यह देख गुस्साएं तीर्थक्षेत्र के साधु संतों व नाव संचालकों ने नगर पंचायत कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। तब जाकर नए पुल का फाटक बंद कराया गया। साधु संतों का आरोप है कि नए घाट का निर्माण करा रहे ठेकेदार के इशारे पर फाटक खोला गया है।
रामघाट के पास इन दिनों नए घाट का निर्माण हो रहा है। जिसके लिए ठेकेदार ने सीतापुर मार्ग की ओर वाले घाट निर्माण के लिए लगभग 25 मीटर का क्षेत्रफल पर बालू व गिट्टी की बोरियां लगाकर पानी को रोका है। शुक्रवार की सुबह ठेकेदार ने घाट निर्माण के लिए नए पुल पर लगे एक दर्जन फाटक अचानक खोल दिए। जिससे मंदाकिनी घाट पर एकत्र पानी निकलने लगा। घाट पर जलस्तर कम होने से कई स्थान पर मिट्टी दिखने लगी।
यहां तक कि सैकड़ों मछलियां भी तड़पती दिखाईं दी। इसकी जानकारी होते ही भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवनदास और निर्मोही अखाड़े के संत दीपक दास समेत कई साधु विरोध जताने मौके पर पहुंच गए। इस बीच मइयादीन, कृष्णा, मूलचंद्र, विनोद, दीपक, नंदू, फूलचंद्र आदि नाव चालकों ने भी नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
विरोध की सूचना पर नगर पंचायत की अध्यक्ष प्राची चतुर्वेदी और पूर्व अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे। सभी को शांत कराते हुए तुरंत पुल के फाटक बंद कराए। इस बारे में ठेकेदार ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि घाट निर्माण में अड़चन आने के कारण फाटक खोला गया था। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि फाटक खोलने की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी।