चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंदाकिनी नदी में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा है कि मंदाकिनी का प्रदूषण दूर करने में यूपी और एमपी के प्रशासनिक अधिकारी उदासीन हैं। दोनों प्रदेशों के 50 से अधिक ऐसे नाले हैं, जो सीधे मंदाकिनी नदी में गिर रहे हैं। इन पर रोक नहीं लग पा रही है। नमामि गंगेे की तर्ज पर बनी जिला गंगा समिति में कहने को तो अधिकारियों और समाजसेवियों की फौज है, लेकिन नौ महीने से इसकी बैठक तक नहीं हुई। इसी से मंदाकिनी को प्रदूषण मुक्त करने की गंभीरता का पता चलता है।
जगद्गुरू ने कहा कि नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। मंदाकिनी सिकुड़ती जा रही है। कई जलस्रोत भी बंद हो गये हैं, जिससे नदी की जलधारा कम हो गई है। मंदाकिनी से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में स्नान करने आते है। इसके बाद भी यूपी और एमपी क्षेत्र में बसी बस्तियों के गंदे नाले इसमें डाले जाते हैं। इससे नदी का पानी प्रदूषित होता है। कहा कि दोनों प्रदेशों के 50 से अधिक नाले ऐसे हैं, जो मंदाकिनी नदी में गिर रहे हैं।
इन पर रोक लगाई जानी चाहिए। कहा कि उन्होंने अपने प्रमोद वन स्थित कांच मंदिर के गंदे नाले को बंद कर दिया है। नाले का पानी नदी में नहीं डाला जा रहा है।
इस तरह से अन्य मठ, मंदिर और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों को मंदाकिनी नदी में गिरने वाले नालों को बंद कराना चाहिए।