फोटो 06 सीकेटीपी-20- एमपी पुल के नीचे मंदाकिनी की धारा में फैली शैवाल। संवाद
चित्रकूट। पवित्र मंदाकिनी नदी इन दिनों पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। एमपी-यूपी सीमा पुल से रामघाट और बालाघाट तक नदी के एक बड़े हिस्से में शैवाल की मोटी परत बिछ गई है। इससे नदी के पानी की गुणवत्ता गिर रही है। जबकि नदी की सफाई पर हर साल करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
पिछले साल 25 मई को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्वयं नदी में उतरकर एक सफाई अभियान चलाया था और भविष्य में भी सफाई जारी रखने का आश्वासन दिया था। उनके जाने के बाद से, नदी की सफाई की जिम्मेदारी केवल समाजसेवियों पर ही आ गई है, जबकि अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं।
जल संस्थान के एक्सईएन फरहत हुसैन ने बताते हैं कि एमपी ब्रिज के आसपास शैवाल की मोटी परत जल प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इससे जल भी प्रदूषित हो रहा है। पानी के अंदर मछलियां भी इसमें फंस कर मर जाती हैं। लोग इसकी सफाई पर ध्यान नहीं देते हैं।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन एसके प्रसाद ने बताया कि मंदाकिनी नदी में सफाई संबंधी मुद्दों को लेकर जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।