लगातार बारिश से मंदाकिनी शुक्रवार सुबह तक खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बहती रही तो आखिर शाम को कुछ राहत मिली। फिर भी नदी का पानी खतरे के निशान के पास ही रहा। इसके अलावा यमुना व अन्य छोटी नदियां उफान पर हैं। एनडीआरएफ की टीम मानिकपुर क्षेत्र में बचाव व राहत कार्य में जुटी रही।
मंदाकिनी किनारे बाढ़ राहत की विशेष पीएसी टुकड़ी तैनात रही। राजापुर व मऊ क्षेत्र के दो दर्जन गांवों में बारिश का पानी घुस गया है। हाइवे पर कपसेठी गांव के पास विशाल पेड़ गिरने से एक घंटे तक मार्ग बाधित रहा। जानकारी होने पर सदर एसडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने मौके पर जाकर वन विभाग के कर्मचारियों के साथ पेड़ को रास्ते से हटवाकर मार्ग बहाल कराया।
मऊ के परदवां समेत आधा दर्जन गांव में यमुना का पानी पहुंच गया है। जिससे आवागमन बाधित है। अहिरी व सुरौंधा पुलिया की हालत जस की तस होने के कारण झांसी-मिर्जापुर मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन ठप रहा। छोटे वाहनों को बाईपास से निकाला जा रहा है।
मंदाकिनी शुक्रवार को भी लाल निशान के ऊपर बहती रही। सती अनुसुइया से लेकर बनकट तक मंदाकिनी का रौद्र रूप शाम तक रहा। देर शाम को जलस्तर कम हुआ लेकिन फिर भी खतरे के निशान के आसपास ही पानी बना रहा।
नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। रामघाट व आसपास के घाटों में बाढ़ विशेषज्ञ पीएसी टीम तैनात रही।
मानिकपुर के गिदुरहा व चमरौहा गांव में एनडीआरएफ की टीम का बचाव कार्य जारी रहा। सुबह बरदहा नदी व अन्य बांधों में उफान होने के कारण टीम दोपहर को राहत कार्य सही तरीके से नहंी कर पाई लेकिन शाम तक चमरौंहा गांव में फंसे लगभग सौ लोगों को सुरक्षित गिदुरहा तक पहुंचाया गया।
मानिकपुर एसडीएम रामसकल मौर्य ने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित लोगों को शासन की ओर से भोजन पानी का इंतजाम किया जा रहा है। स्थानीय प्रधान व कुछ समाजसेवी भी इस काम में लगें हैं।
जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि मानिकपुर समेत राजापुर क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में गिरे मकानों की सूची तैयार कर ली गई है। राजापुर के खोपा गांव में कच्चा मकान ढहने से दबकर मृत वृद्धा के परिजनों को चार लाख की आर्थिक सहायता दी गई है।
इसी प्रकार पूरे टूटे या क्षतिग्रस्त 180 मकान के परिजनों को पांच लाख 76 हजार रूपए की मदद बांटी गई है। अपर जिलाधिकारी हवलदार सिंह ने बताया कि अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के दौरान होने वाली घटनाओं की सूची तैयार की जा रही है। नियमानुसार शासन की मदद की जाएगी।
गुंता बांध के ओवरफ्लो होने से राजापुर क्षेत्र तक के एक दर्जन गावाें में पानी घुस गया है। हालात यह है कि चौरा, दरसेंडा, नहरा,कहेटामाफी, गढ़ीघाट व बक्टा क्षेत्र में नाव से ग्रामीणों को लाया ले जा रहा है।
रैपुरा के विनोद यादव, राजकुमार, छबिलाल, अभिमन्यु, सुंदरलाल व नत्थू आदि ने बताया कि यदि इस बांध का पानी छोड़ा गया तो लाखों की संपत्ति बर्बाद हो जाएगी। गुंता बांध के पानी से राजापुर क्षेत्र का बरूआ गांव टापू बन गया है।
पूरे गांव में लगभग ढाई सौ लोगों का मुख्यालय समेत आसपास के गांव से संपर्क कट गया। इस गांव के एक तरफ यमुना का पानी है तो दूसरी तरफ गुंता बांध का पानी है।