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जेल के अंदर सुरक्षित नहीं तो बाहर क्या होगा, कहीं फिक्स तो नहीं मामला

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चित्रकूट। जिला जेल में इस घटना के बाद विपक्षियों को सत्ता पक्ष पर तीखा हमला करने का मौका मिला है। कई विपक्षी नेताओं ने यहां तक कहा कि यह मर्डर व मुठभेड़ पहले से ही फिक्स थे। दोनों मर्डर कराने के लिए अंशू को मोहरा बनाया गया फिर पुलिस के माध्ययम से साक्ष्य मिटाने को उसे भी ढेर कर दिया गया है। जेल के अंदर गैंगवार में तीन बंदियों के मारे जाने के बाद राजनैतिक दलों के नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस वारदात से प्रदेश सरकार की सुरक्षा की पोल खुल गई है। जब जेल के अंदर कोई सुरक्षित नहीं रह सकता तो बाहर क्या रहेगा।
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सपा के पूर्व विधायक वीर सिंह जिला जेल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जेल के अंदर यह हाल तो बाहर क्या होगा। जिला उपाध्यक्ष सत्यनारण पटेल ने कहा कि भाजपा राज में कोई सुरक्षित नहीं है। जब जेल के अंदर ही हत्यायें हो रही है तो बाहर वालों को कौन बचायेगा। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा ने कहा कि योगी राज नहीं यह जंगल राज है। जेल के अंदर असलहे खुले आम पहुुंचा जा रहे है। इसके बाद हत्यायें की जा रही है। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है। माकपा के कामरेड रूद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि जेल के अंदर ही घटना बड़ी साजिश समझ में आ रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से सुनियोजित मर्डर हैं। जिसमें अंशू के माध्ययम से दो बंदियों को पहले मरवाया गया फिर पुलिस से मिलकर उसे भी मार गिराया गया है ताकि सबूत मिट जाएं। बसपा के जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है।
चित्रकूट। जुलाई 2018 की बागपत जेल में माफिया डान प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या और अब तीन साल बाद मई 2021 में चित्रकूट जेल में पूर्वाचंल के तीन माफियाओं की मौत की घटना को देखें तो काफी कुछ समानता मिलती है। जिसकी सरकारी कागजों में जांच ही जांच चल रही है। दोनाें घटनाओं में जेल के अंदर असलहा पहुंचने और ताबडतोड़ फायरिंग होने की समानता है। एक अंतर जरूर है कि चित्रकूट के जेल में एक साथ तीन अपराधियों की गोली लगने से मौत की घटना अपने आप में अकेली है। अभी तक यूपी के किसी जेल में एक समय पर एक साथ तीन अपराधियों की गोली लगने से मौत नहीं हुई है। पुलिस को जेल के अंदर ही मुठभेड करनी पड़ी। पुलिस ने घेराबंदी कर उस हत्यारोपी को गोलियों से भून दिया जिसने कुूछ देर पहले अपने ही दो अपराधी साथियों को गोलियों से उडाया था।
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