बागवानी सम्मेलन में इंडियन काउंसिल फार एग्रीकल्चर रिसर्च नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डा.आर सी अग्र
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चित्रकूट/खोही में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में चल रहे तीन दिवसीय इंडियन हॉर्टिकल्चर समिट 2020 का समापन ह़ुआ। रविवार के अंतिम सत्र में 9 तकनीकी सत्रों के निष्कर्षों और परिणामों की उपयोगिता और व्यवहारिक प्रासंगिकता पर विद्वानों ने विचार रखे।
इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डा. आरसी अग्रवाल ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज के जमाने में अपनाना जरूरी है। खेती बागवानी से लेकर हर क्षेत्र में इसका प्रमाण है कि इससे कहीं नुकसान नहीं है बल्कि इससे बढ़ोत्तरी ही होती है।
आधुनिक शिक्षा भी इसी पर आधारित है। बागवानी में वैज्ञानिक तरीके अपनाने वाले किसान सफल हैं। कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने देश भर से आये विद्वानों और संस्थाओं का आवाहन करते हुए कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय नवाचारों का हिमायती है। हम चाहते हैं कि वैज्ञानिक इस विश्वविद्यालय को अपने नवीन प्रयोगों की प्रस्तुति के लिए प्रदर्शन केंद्र के रूप में मान्यता प्रदान करें।
इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डा. आरसी अग्रवाल का सार्वजनिक सम्मान किया गया। अंत में निर्णय लिया गया कि तकनीकी सत्रों की रिपोर्ट मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को क्त्रिस्यांवयन के लिए भेजी जाएगी। कुलपति प्रो. गौतम ने विश्वविद्यालय की ओर शाल श्रीफल और कामदनाथ का स्मृति चिन्ह भेंट किया। कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डीपी राय व पीआरओ जयप्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।