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महंत आशदेव बने

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फोटो-9- खोही अखाड़ा का महंत बनने के बाद महंत श्यामदास ने जगदगुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया। ? - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट (खोही)। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार को धर्म नगरी के सभी साधु-संतों व महंतों ने सर्वसम्मति से महंत श्यामदास को कंठी चादर पहनाकर बड़ा अखाड़ा खोही का महंत घोषित किया। हालांकि धार्मिक अनुष्ठान में संतोषी अखाड़ा के महंत नहीं आए। समारोह में पहुंचे जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने महंत श्यामदास कंठी चादर पहनाकर आशीर्वाद दिया। उनके साथ निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास मौजूद रहे।
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समारोह में सात अखाड़ों में छह अखाड़ों के महंत हाथी-घोड़ों के साथ पूरे समय अखाड़े में मौजूद रहे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संबोधन में कहा कि वह रामानंद संप्रदाय के जगतगुरु हैं। महंत श्यामदास को भलीभांति जानते हैं, वह स्वामी कल्याण दास के लाडले शिष्य थे। अखाड़ों पर सवाल उठाने वालों पर उन्होंने कहा कि जो संत अखाड़ों के अस्तित्व को नकारते हैं, वह संत नहीं है।
उन्होंने कहा कि अखाड़ा के चिह्न हनुमान जी होते हैं। सभी संत हनुमान जी की सेवा करते हैं। बिना अखाड़ों के संत नहीं माना जाता। अखाड़ा परिषद में महंती के समय विरक्त संत मंडल नहीं नजर आए। निर्वाणी, महानिर्वाणी, दिगंबर, निर्मोही, निरालंबी, खाकी अखाड़ों के चिह्न और महंत उपस्थित रहे, जबकि संतोषी अखाड़ा के महंत और यहां का निशान महंती के समय मौजूद नहीं था। उधर, महंत पर दावेदारी कर रहे संत कल्याण दास के पुत्र संतोष तिवारी ने कहा कि उनके साथ गलत हुआ है। वह कोर्ट की शरण लेंगे। इसके पूर्व महंती को लेकर विवाद होने की संभावना पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी।
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