राम कथा कर्तव्य बोध कराती है। भारतीयों की रग-रग में राम बसे हैं। रामचरित की पूंजी को आदर्श मानकर काम करने से देश का भविष्य उज्ज्वल रहेगा। चित्रकूट की धरती ने राम को राम बनाया। ये बातें बुधवार को राष्ट्रीय रामायण मेले में मुख्य अतिथि उप्र के राज्यपाल राम नाईक ने कहीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर रामायण मेले के दूसरे दिन का औपचारिक उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि राम शब्द जादू जैसा है। जन्म से अंत तक राम का नाम लोग लेते हैं। चित्रकूट की मिट्टी को नमन करना चाहिए, जिसने राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाया। उन्होंने इस बात का अफसोस भी जताया कि नानाजी देशमुख उनको यहां आने के लिए न्योता देते रहे और आज जब वह आएं हैं तो नानाजी नहीं हैं।
डा. राममनोहर लोहिया को भी उन्होंने याद किया। उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म का वास्तविक मतलब समझना चाहिए। राम भारतीयों के नहीं बल्कि पूरे विश्व के हैं। मौके पर सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया, नगर पालिका अध्यक्ष नीलम करवरिया, पूर्व सांसद रमेश चंद्र द्विवेदी, भाजपा जिलाध्यक्ष जयविजय सिंह, पूर्व विधायक दिनेश प्रसाद मिश्र, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान जयेंद्र सरस्वती संस्कृति विद्यालय के बच्चों ने स्वस्तिवाचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता पीठाधीश्वर डा. आरएस त्रिपाठी तिर्पुर स्वामी ने की। प्रयाग विश्वविद्यालय के डा. सभापति मिश्र ने चित्रकूट को समन्वय की भूमि बताया। कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न भेंट किया। पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस ने आभार जताया।