भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा का शनिवार को तरौंहा स्थित जयदेव दास अखाड़े से शुभारंभ होगा। मंदिर के पुजारी रमाशंकर महाराज ने बताया कि भगवान का विराजमान होना और प्रतिवर्ष रथयात्रा के माध्यम से दर्शन देना यहां के लोगों के लिए सौभाग्य की बात है।
रथयात्रा के इतिहास को लेकर उन्होंने बताया कि एक बार माता जानकी ने बहन सुभद्रा से बताया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी सखियों से मिलने सखी रूप में आते हैं। सुभद्रा को इस बात का विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने उस रूप को देखने की ठान ली।
एक दिन जब भगवान सखी रूप में आए तो वहीं छिपी बहन सुभद्रा ने भगवान के उस स्वरूप को देखकर उन्हें टोक दिया। भगवान रूठकर यात्रा पर निकल गए। बाद में माता जानकी ने भी उसी यात्रा का अनुसरण किया और उनके पड़ाव स्थल पहुंचकर उनकी ध्वजपताका निकाल र्लाइं और रसोई छिन्न भिन्न कर दी। सुबह जब भाई बलभद्र ने देखा कि धर्मपताका नहीं है तो उन्होंने प्रभु से लौटने को कहा क्योंकि उस समय धर्मपताका ही उपस्थिति की प्रतीक थी। इस तरह जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा की तर्ज पर प्रतिवर्ष यहां भी तरौंहा के जयदेव दास अखाड़े से सौ साल से भी पुरानी यह परंपरा निभाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को भगवान के स्वरूप रूठकर मंदिर से निकल आए और शुक्रवार को रथ मंदिर के दरवाजे पर लग गया। शनिवार को विधिवत पूजन अर्चन के बाद भगवान की रथयात्रा शुरू होगी। पहले पड़ाव में यात्रा कच्ची छावनी पहुंचेगी। दूसरे दिन सदर तिराहे में भगवान विश्राम करेंगे और सोमवार को यात्रा सोनेपुर पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा वापस अखाड़े पहुंचेगी और भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। स्वामी रामशरण दास ने बताया कि रथयात्रा शाम चार बजे से निकलेगी।