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लॉकडाउन: यात्री फंसे, उल्लंघन में कई के चालान

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झांसी से लौटे युवकों को मुख्यालय में नहीं मिला साधन तो मऊ गांव जाने को पैदल निकल पड़े। - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। पचपन घंटे के लॉकडाउन का जिले में पहले दिन खासा असर रहा। किराना, मेडिकल व सब्जी की दुकानें खुलीं। लोग बेहद जरूरी काम से बाहर निकले। शहर और आसपास के इलाकों में लॉकडाउन का पालन कराने के लिए नोडल अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय और पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने जायजा लिया। बाहर से आए कई यात्री लॉकडाउन में फंस गए। यह साधन की तलाश में भटकते रहे। उल्लंघन में दो पहिया और चार पहिया वाहनों के चालान किए गए। सदर एसडीएम अश्वनी पांडेय और रजनीश यादव ने शहर के कई हिस्सों में पैदल मार्च कर व्यवस्था देखी। अपर एसपी प्रकाश स्वरूप पांडेय ने राजापुर व मानिकपुर क्षेत्र में लॉकडाउन के पालन को लेकर स्थिति देखी।
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सुबह से तेज बारिश व 55 घंटे के लॉकडाउन को लेकर शहर की प्रमुख सड़कों पर सन्नाटा रहा। बारिश थमने पर लोग सब्जी व अन्य जरूरी सामग्री लेने निकले। बिना मास्क व हेलमेट वाले वाहन चालक चौराहों पर पुलिस की चेकिंग में फंस गए। कोतवाल पंकज पांडेय, यातायात विभाग के टीआई घनश्याम पांडेय व टीएसआई योगेश कुमार ने टीम बनाकर वाहनों की जांच कराई। बिना मास्क के निकले दो पहिया वाहन चालकों के चालान काटे गए।
डीएम शेषमणि पांडेय और एसपी अंकित मित्तल ने प्रमुख स्थलों पर निरीक्षण किया। शहर में लाउडस्पीकर से दुकानें बंद रखने और लोगों से घर से न निकलने की अपील की गई। सीतापुर और पुराने बाजार में कुछ जगह पुलिसकर्मियों से वाहन चालकों और जरूरी काम से निकले लोगों की बहस भी हुई।
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अधिकारियों ने समझाकर बंद कराईं दुकानें
ग्रामीण इलाकों में भी लॉकडाउन का असर रहा। मऊ, मानिक पुर, राजापुर, शिवरामपुर, भरतकूप, पहाड़ी सहित भौरी व खोही के बाजार बंद रहे। कुछ लोगों ने दुकानें खोल ली थीं। अधिकारियों ने इन्हें समझाकर दुकानें बंद करा दीं। मानिकपुर एसडीएम संगमलाल गुप्ता, राजापुर एसडीएम राहुल विश्वकर्मा व मऊ एसडीएम राजबहादुर ने निरीक्षण कर लॉकडाउन का पालन कराया।
वाहन नहीं मिला, पैदल गए अपने गांव
लॉकडाउन से धर्मनगरी में आए श्रद्धालु फंस गए। रिश्तेदारों के यहां आने वालों के साथ भी यही हुआ। अस्पतालों में इलाज कराने आने वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह वाहन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। मऊ क्षेत्र के बेरोचा गांव के हरीओम, रामबाबू, अनिल, सुशील आदि पूनमा में काम करते थे। यह झांसी से जिला मुख्यालय पहुुंचे। लॉकडाउन से पैदल गांव जाने को मजबूर होना पड़ा। चौरा गांव के भूरा अपनी नातिन के टूटे हाथ का इलाज कराने आए थे। यह गांव जाने के लिए वाहन की तलाश करते रहे।
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