चित्रकूट। सिविल जज सीनियर डिवीजन डॉ. सचिन कुमार दीक्षित ने आचार संहिता उल्लंघन के मामले में तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी अमिता बाजपेयी और भाजपा जिलाध्यक्ष लवकुश चतुर्वेदी को बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2009 का है।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बांदा से अमिता बाजपेयी भाजपा से प्रत्याशी और लवकुश चतुर्वेदी भाजपा के जिलाध्यक्ष थे। 17 मार्च 2009 को उपजिलाधिकारी कर्वी को रौली कल्याणपुर में एक मंदिर में अमिता बाजपेयी से संबंधित पोस्टर मिले थे। इसके बाद 19 मार्च 2009 को लवकुश चतुर्वेदी को नोटिस जारी किया गया था। जवाब से संतुष्ट न होने पर 6 अप्रैल 2009 को दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।
आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल होने के बाद। न्यायालय ने पाया कि दंगे के इरादे से उकसाने का तत्व पूरा नहीं होता है। विवेचक ने पोस्टर संकलित नहीं किया और न ही यह स्पष्ट हुआ कि पोस्टर में क्या लिखा था। कोर्ट ने यह भी पाया कि अमिता बाजपेयी को कोई नोटिस या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था, जो प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है। (संवाद)
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गैर इरादतन हत्या के प्रयास के आरोपी को अग्रिम जमानत
चित्रकूट। सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने गैर इरादतन हत्या प्रयास के मामले में आरोपी हिमांशु उर्फ अभिषेक गुप्ता को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायालय ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामला कर्वी थाना क्षेत्र का है।
कर्वी कोतवाली क्षेत्र के शंकर शिवहरे बहन चांदनी और अपने मित्र अनुज त्रिपाठी के साथ एक जनवरी 2026 को शाम 5:30 बजे सीतापुर स्थित बैचलर कैफे में थे। तभी यश ठाकुर, हिमांशु गुप्ता, गोपाल भदौरिया और कुछ अज्ञात लोग शराब के नशे में वहां आए। उन्होंने बहन से बदतमीजी की। कुछ देर बाद हमलावर दोबारा डंडे लेकर आए और तीनों को मारा था, जिससे शंकर शिवहरे का सिर फट गया। पीड़ित ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी हिमांशु के अधिवक्ता ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी डाली थी। (संवाद)
चेक बाउंस मामले में आरोपी को मिली जमानत
चित्रकूट। सिविल जज सीनियर डिवीजन, एफटीसी अश्विनी कुमार उपाध्याय की अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को जमानत दे दी। न्यायालय ने 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक जमानत दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया। मामला कर्वी कोतवाली क्षेत्र का है। शहर के अरुण कुमार ने चेक बाउंस के आरोप में सतीश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में जमानत अर्जी डाली थी। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए सतीश कुमार को जमानत पर रिहा करने योग्य पाया। (संवाद)