जो किसी पर फिदा नहीं होता, उसका इस दुनिया में कोई खुदा नहीं होता’’ प्रेम ही परमात्मा है। जीवन की जो यात्रा है। प्रेम के साथ हीपूर्ण होती है। यह दिव्य वचन दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर चित्रकूट में चल रही राम कथा में संत मोरारी बापू ने कहे।
उन्होंने कहा कि भरत धर्म है। भरत जी के नियम, व्रत का वर्णन नहीं किया जा सकता। इस धर्मनगरी से दुनिया को रामराज्य का संदेश दिया जाये, यहॉ की पवित्र भूमि से दिया जा सकता है। रामचरित मानस जैसा बिन साम्प्रदायिक दुनिया में कोई ग्रंथ नहीं। शासन को इसे हर घर में देना चाहिये।
सोमवार को बापू ने कहा कि भगवान राम भी हमेशा भरतजी के गुण गाते थे। उनका मानना था कि जिस अंदाज में भरत ने भाई प्रेम का उदाहरण दुनिया के सामने रखा है उससे सबको सबक लेना चाहिए। सिर्फ कथा श्रवण ही न करें बल्कि उसके आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करें तो यह सफलता दिलाती है। जब तक इंसान भगवान के प्रति समर्पण और प्रेम का भाव नहीं रखेगा तब तक उसे जीवन में सफलता नहीं मिलेगी। प्रेम कई तरह के होते हैं।
प्रेम मां का सबसे अमूल्य होता है उसी तरह भक्त का भगवान के प्रति प्रेम होने से मां जैसा ही विश्वास होता है। बापू की नौ दिवसीय रामकथा का आकर्षण सांस्कृतिक संध्या भी है। कथा के दौरान रात्रि को कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी के पुत्र कत्थक नृत्यक विशाल कृष्ण एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुति दी गई।उन्होंने कहा िक ऐसी कला को बढ़ावा मिलना चाहिए। कलाकार को सम्मानित भी किया।