चित्रकूट। हत्या कर सबूत मिटाने वाले तीन लोगों को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला लगभग 10 वर्ष पुराना है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के कोलौहा गांव निवासी जयराम ने बताया कि 29 अप्रैल 2015 की रात उसके बेटे मुलायम को बुलाने गांव के ही बिल्लू उर्फ सोमपाल यादव, विजय यादव और बांदा जिले के बदौसा थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी झुल्लू उर्फ चंद्रपाल आए थे। उन्होंने मुलायम को भगवतपुर ले जाने की बात कही।
मुलायम की मां ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तीनों थोड़ी देर में लौटने की बात कहकर उसे साथ ले गए। देर रात तक जब मुलायम वापस नहीं आया तो परिजनों ने तलाश शुरू की। गांव के बाहर खोजने पर मुलायम का शव पेड़ से लटका मिला।
परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या कर आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पेड़ से लटकाया गया था। पुलिस ने सूचना पर तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। 31 अक्तूबर 2015 को पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। बृहस्पतिवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अनुराग कुरील ने तीनों लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।