चित्रकूट। जिंदा को मृत दिखाकर करोड़ों की जमीन का फर्जी वरासत करने के मामले में लेखपाल को डीएम ने निलंबित कर दिया। एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी भी गठित कर वरासत करने में दोषी मिलने पर अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है।
तहसील कर्वी के सीतापुर निवासी कल्लू उर्फ कन्नू कुशवाहा ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि खतौनी की नकल निकलवाने पर पता चला कि उनकी बेशकीमती जमीन गांव निवासी कुट्टू रैकवार ने 1959 में उनको मृत दिखाकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया। उसने करीब एक बीघा जमीन अपने नाम 22 अक्तूबर 2024 को वरासत करा लिया। आरोप लगाया कि हल्का लेखपाल ने बिना मौके पर गए ही झूठी रिपोर्ट लगा दी थी, जिस पर वरासत की गई है।
अधिवक्ता राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि कुट्टू रैकवार ने न्यायालय में जो कागजात जमा किए हैं, उसमें कल्लू को पिता दिखाया है। इसमें बताया कि कल्लू की मृत्यु 1959 में हो गई है, जबकि कुट्टू रैकवार के आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1966 दर्ज है। अब सवाल यह है कि पिता की मौत के सात साल बाद बेटा कैसे हो गया। इसका मतलब तहसील के अधिकारियों ने फर्जी तरीके से वरासत की है। मामले को अमर उजाला ने शुक्रवार 31 जनवरी के अंक में जिंदा को मृतक दिखाकर करोड़ों की जमीन कराई वरासत नामक शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था।
खबर को संज्ञान में लेकर डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने लेखपाल आलोक मिश्रा को निलंबित कर दिया है। वहीं नायब तहसीलदार को पूरे अभिलेखों के साथ तलब किया है।
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एडीएम न्यायिक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। जो पूरे मामले की जांच करेगी। जांच में जो भी अधिकारी व कर्मचारी की गलती मिलेगी, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसडीएम पूजा साहू ने बताया कि वरासत को फिलहाल कैंसिल कर दिया गया है। नायब तहसीलदार से लेकर जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।