चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट पर वृंदावन की तर्ज पर लट्ठमार होली का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान भक्ति, प्रेम और सनातन संस्कृति के रंग बिखर उठे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया।
नदी तट पर गूंजते भजन, संकीर्तन और होली के रसिया ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। ऐसा लगा मानो पूरा चित्रकूट धाम राम और कृष्ण की भक्ति में डूब गया हो। श्री रामदरबार एवं श्री राधा-कृष्ण की झांकियों ने भक्तों का मन मोह लिया।
भक्तिमय प्रसंगों का संगीतमय वर्णन और भजन संध्या ने माहौल को और आध्यात्मिक बनाया। जब फूलों और गुलाल की होली शुरू हुई, तो पूरा रामघाट भक्तिरस से सराबोर हो उठा। रसिया भजनों की धुन पर श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को प्रेम और भक्ति के रंगों से सराबोर किया।
सनातन संस्कृति का प्रमाण
कामदगिरि पीठ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महंत डॉ. मदन गोपाल दास ने धर्मनगरी की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि संत तुलसीदास जी ने स्वयं इस भूमि की महिमा गाई है। यह वही पावन भूमि है, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास के अमूल्य वर्ष बिताए थे। महंत डॉ. दास ने जोर दिया कि कामदगिरि पर्वत, मंदाकिनी नदी और संतों की तपोभूमि हर भक्त को आध्यात्मिक शांति देती है। उन्होंने बताया कि यहां होने वाले धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रमाण हैं।