चित्रकूट। स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र जिला अस्पताल मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले विशेषज्ञ डॉक्टरों की गंभीर कमी से जूझ रहा है। इस अभाव का सीधा असर इलाज की गुणवत्ता और समय पर उपचार मिलने पर पड़ रहा है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चित्रकूट जिला अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2023 में जहां 16,076 मरीज भर्ती हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 19,381 हो गई। वर्ष 2025 में भी 18,110 मरीज भर्ती हुए, और वर्तमान वर्ष के जनवरी महीने में ही लगभग 250 मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। यह बढ़ती हुई संख्या अस्पताल पर बढ़ते दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हालांकि, अस्पताल में सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण अब तक लगभग 170 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ा है। हालांकि, लगातार आंदोलनों, जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और अधिकारियों के निरीक्षण के बाद अस्पताल की कुछ सेवाओं में सुधार हुआ है। अस्पताल परिसर में पीडियाट्रिक वार्ड की शुरुआत की गई है, जिससे बच्चों को इलाज में राहत मिली है।
लंबे समय से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है। लंबे समय से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इसके अतिरिक्त, त्वचा रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, फिजीशियन, न्यूरो सर्जन, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद भी खाली हैं। इन रिक्तियों के कारण, विशेषकर सर्दी के मौसम में, न्यूरो और हार्ट संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अस्पताल में जो भी पद स्वीकृत हैं, उनकी मांग संबंधित अधिकारियों से की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। फिलहाल, मौजूदा डॉक्टरों द्वारा ही इलाज किया जा रहा है और केवल गंभीर अवस्था में ही मरीजों को रेफर किया जाता है।
- डॉ. शैलेंद्र कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।