चित्रकूट। इस वर्ष चैत्र नवरात्र श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हालांकि, ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस अवधि में मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।
15 मार्च से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो रहा है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। नवरात्र के शुरुआती दिनों में पंचक का भी साया रहेगा। पंडित रमेश द्विवेदी और शिवभजन भारद्वाज ने बताया कि जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उसे खरमास कहते हैं। इस दौरान सूर्य का तेज और गुरु बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। सनातन धर्म में शुभ कार्यों के लिए सूर्य और गुरु की मजबूत स्थिति आवश्यक है। इसलिए 14 अप्रैल को मेष संक्रांति तक शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यापार की शुरुआत वर्जित है। पंचक के कारण निर्माण कार्य और दक्षिण दिशा की यात्राओं में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ज्योतिषियों का मत है कि नवरात्र में देवी पूजा और आध्यात्मिक अनुष्ठानों पर इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
खरमास में दान और पूजा का महत्व
ज्योतिषियों के अनुसार, मलमास में पीले फल और अनाज का दान करना पुण्यदायी माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए। प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करने की भी सलाह दी गई है। साथ ही, इस समय सात्विक भोजन करना उत्तम माना जाता है।