दीनदयाल शोध संस्थान के सहयोग से रामनाथ गोयनका घाट सियाराम कुटीर चित्रकूट में तीन दिवसीय शरदोत्सव की दूसरी रात लोक संस्कृति की धूम रही।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से भारतीय परंपरा के विभिन्न रंगों की छटा बिखरी। इसका उद्घाटन मप्र के ऊर्जा व खनिज, प्रभारी मंत्री सतना राजेंद्र शुक्ल ने किया।
उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण के लिए यह आयोजन अविस्मरणीय है। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत जैसलमेर राजस्थान से आए अमीन खां एवं इंदु खां की टीम ने मांगणियार गायन से किया।
केसरिया बालम पधारो म्हारे देश.... एवं दमादम मस्त कलंदर गीतों पर विभिन्न तानों, मुरकी और वाद्ययंत्रों की विविधता ने लोगों को मुग्ध कर दिया।
गायकी के साथ प्रयोग किए गए पारंपरिक वाद्ययंत्र मोरचंग खड़ताल, भपंग एवं ढोलक की जुगलबंदी ने गोयनका घाट पर श्रोताओं के बीच समा बांध दिया।
आसाम के कलाकारों ने नौ लोक एवं जनजातीय नृत्य प्रस्तुत किए। भटिंडा पंजाब के कलाकारों ने समीर माही के नेतृत्व में जिदुंआ, गिद्दा तथा भांगड़ा की प्रस्तुतियां दीं।
जिंद माही ले चलियो पटियाले, वहां से मिलते रेशमी नाले... की पंजाबी जिदुंआ प्रस्तुति में चिमटा, ढोल, हल्कोपा, सिक्का तथा ढपली आदि वाद्य यंत्रों से घाट का माहौल पंजाबी धुनमय हो गया। जिसमें सभी झूम उठे।